विधानसभा चुनाव में खान-पान और संस्कृति का बढ़ता प्रभाव
राजनीति से ज्यादा खान-पान पर ध्यान
इस बार के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक मुद्दों की तुलना में खान-पान, संस्कृति, भाषा और पहनावे पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। खासकर, खान-पान का मुद्दा पश्चिम बंगाल से लेकर केरल तक समान रूप से उभरा है। चुनाव प्रचार के दौरान, ममता बनर्जी ने यह दावा किया कि यदि भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई, तो वह बंगाल के निवासियों को मांस और मछली खाने से रोक देगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, शुभेंदु अधिकारी और अन्य नेताओं ने मांस और मछली की दुकानों का दौरा किया। वहां उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि भाजपा ऐसा कोई कदम नहीं उठाने जा रही है और ममता बनर्जी केवल अफवाह फैला रही हैं। सभी नेताओं के हाथ में मछली की छोटी-छोटी टोकरियां थीं। बंगाल के चुनाव में यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण बन गया कि चैत्र नवरात्र के दौरान भाजपा के एक उम्मीदवार ने हाथ में मछली लेकर प्रचार किया।
मछली का मुद्दा केरल में भी
मछली का मुद्दा केवल पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि केरल में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मछली भेंट की जब वह एक सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। इस दौरान मंच पर उन्हें मछली भेंट की गई। जिस तरह कृषि प्रधान राज्यों में नेताओं को हल भेंट किया जाता है, उसी प्रकार केरल और बंगाल में मछली भेंट की जा रही है। भाजपा इस मामले में कुछ भी करे, उसका नैरेटिव प्रभावी नहीं हो पा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि विपक्षी पार्टियों ने भाजपा को अपने नैरेटिव में उलझा दिया है। संयोग से, इस बार जिन पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वे सभी खान-पान की संस्कृति से जुड़े हुए हैं। इसलिए भाजपा इस बार बैकफुट पर नजर आ रही है।
