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विश्व बैंक प्रमुख की चेतावनी: सीजफायर टूटने पर वैश्विक संकट का खतरा

विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा सीजफायर टूटता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। बंगा ने कहा कि सीजफायर के बावजूद, आर्थिक विकास दर में गिरावट और महंगाई में वृद्धि की संभावना है। इसके अलावा, ऊर्जा संकट से प्रभावित देशों के लिए चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। उन्होंने सरकारों को सलाह दी कि वे ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाएं और नाइजीरिया के मॉडल का उदाहरण दिया।
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विश्व बैंक प्रमुख की चेतावनी: सीजफायर टूटने पर वैश्विक संकट का खतरा

ईरान से जुड़े तनाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

नई दिल्ली - ईरान से उत्पन्न भू-राजनीतिक तनाव के आर्थिक परिणाम अब धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर सामने आने लगे हैं। इस संदर्भ में, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा सीजफायर टूटता है, तो इसके परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही युद्ध फिलहाल थम जाए, लेकिन इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक बना रहेगा।


आर्थिक विकास पर संभावित प्रभाव

ग्रोथ पर पड़ेगा असर
अजय बंगा के अनुसार, यदि सीजफायर जारी रहता है, तो वैश्विक आर्थिक विकास दर में 0.3% से 0.4% तक की गिरावट संभव है। वहीं, यदि स्थिति बिगड़ती है और संघर्ष फिर से तेज होता है, तो यह गिरावट 1% तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर व्यापार, ऊर्जा बाजार और वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर पड़ेगा।


महंगाई में वृद्धि की संभावना

महंगाई का दबाव बढ़ेगा
इस संकट का प्रभाव महंगाई पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। अनुमान है कि यदि सीजफायर जारी रहता है, तो महंगाई 0.2% से 0.3% तक बढ़ सकती है। लेकिन यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह बढ़कर 0.9% तक पहुंच सकती है। विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण होगी, जहां महंगाई दर 6.7% तक जा सकती है।


ऊर्जा संकट की चुनौतियाँ

ऊर्जा संकट से बढ़ेंगी चुनौतियां
ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर देशों के लिए यह संकट और गंभीर हो सकता है। विश्व बैंक पहले से ही ऐसे देशों के साथ संवाद कर रहा है, जो ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर हैं। छोटे द्वीपीय देशों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है, जिसके मद्देनजर इमरजेंसी फंडिंग की तैयारी की जा रही है।


सरकारों के लिए सलाह

सरकारों को सख्त सलाह
अजय बंगा ने सरकारों को चेतावनी दी कि वे अल्पकालिक राहत देने वाली लेकिन दीर्घकाल में अस्थिर ऊर्जा सब्सिडी से बचें। उन्होंने जोर देकर कहा कि देशों को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लानी चाहिए, ताकि भविष्य में आर्थिक अस्थिरता से बचा जा सके।


नाइजीरिया का उदाहरण

नाइजीरिया मॉडल का जिक्र
बंगा ने नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 20 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। इससे न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ी है, बल्कि पड़ोसी देशों को ईंधन निर्यात करने की क्षमता भी विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि परमाणु, पवन, सौर और जलविद्युत जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निवेश बढ़ाना समय की आवश्यकता है, वरना दुनिया फिर पारंपरिक ईंधन पर निर्भर होकर आर्थिक और पर्यावरणीय जोखिम बढ़ा सकती है।