वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई: भारत के लिए नए अवसरों की संभावना
वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल
नई दिल्ली: अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। भारत सरकार ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है, लेकिन इसके आर्थिक और रणनीतिक परिणाम भारत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से भारत को वेनेजुएला में फंसे पुराने बकाए की वसूली और तेल क्षेत्र में पुनः सक्रिय होने का अवसर मिल सकता है।
भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया
वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई के बाद, भारत सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति पर चिंता जताई। नई दिल्ली ने क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को भारत के लिए संभावित अवसर के रूप में देख रहे हैं, जिससे लंबे समय से रुके भारत-वेनेजुएला ऊर्जा संबंधों में नई गति आ सकती है।
वेनेजुएला के साथ पुराना संबंध
कभी बड़ा तेल साझेदार था वेनेजुएला
भारत एक समय वेनेजुएला से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार था, जहां भारत रोजाना चार लाख बैरल से अधिक तेल का आयात करता था। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2022 में भारत को यह आयात रोकना पड़ा। इन प्रतिबंधों ने न केवल व्यापार को प्रभावित किया, बल्कि भारतीय कंपनियों के निवेश और उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला।
ओएनजीसी की स्थिति
ओएनजीसी का अटका बकाया और उत्पादन संकट
ओएनजीसी विदेश लिमिटेड पूर्वी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में साझेदार है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आवश्यक तकनीक और उपकरणों की कमी के चलते उत्पादन घटकर केवल पांच से दस हजार बैरल प्रतिदिन रह गया। वेनेजुएला सरकार ने 2014 तक 53 करोड़ डॉलर का लाभांश नहीं दिया, और बाद में भी लगभग इतनी ही राशि बकाया रह गई, जिससे कुल दावा लगभग एक अरब डॉलर तक पहुंच गया।
नई संभावनाएं
प्रतिबंधों में ढील से नई उम्मीद
ऊर्जा अधिकारियों का मानना है कि अमेरिकी नियंत्रण के बाद वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो ओएनजीसी सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र में आधुनिक उपकरण भेजकर उत्पादन बढ़ा सकेगी। इससे न केवल तेल की आपूर्ति में सुधार होगा, बल्कि पुराने बकाए की वसूली भी संभव हो सकेगी, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत की तेल रणनीति में बदलाव
रूस से दूरी और नए विकल्प
वेनेजुएला में हो रहे बदलाव का असर भारत की तेल रणनीति पर भी पड़ सकता है। अमेरिका की नाराजगी के चलते, भारत पहले ही तेल खरीद में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। वेनेजुएला से आपूर्ति बढ़ने पर रूस से तेल आयात में कमी आ सकती है। इसके अलावा, ओएनजीसी और अन्य भारतीय कंपनियां कैराबोबो-1 जैसे भारी तेल क्षेत्रों में निवेश बढ़ा सकती हैं। माना जा रहा है कि PdVSA के पुनर्गठन में अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जिससे भारत को नए अवसर मिल सकते हैं।
