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वेनेजुएला संकट: वैश्विक बाजारों में निवेशकों की चिंता बढ़ी

वेनेजुएला में हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिका द्वारा मादुरो को हिरासत में लेने के बाद निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। सोने और चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है, जबकि तेल की कीमतों में भी वृद्धि की संभावना है। जानें इस संकट का बाजारों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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वेनेजुएला संकट: वैश्विक बाजारों में निवेशकों की चिंता बढ़ी

वैश्विक बाजारों में तनाव का माहौल

मुंबई: दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला में हाल ही में हुए भू-राजनीतिक घटनाक्रम के चलते साल 2026 का पहला कारोबारी हफ्ता वैश्विक बाजारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


शुक्रवार की रात अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा की कि वेनेजुएला अब अमेरिका के नियंत्रण में है और वहां की स्थिति सामान्य होने तक अमेरिका ही इसे चलाएगा।


अमेरिका ने मादुरो पर नशीले पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाया है, जो एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटना है।


इस घटना के बाद निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोना और चांदी की ओर बढ़ गया है। वहीं, तेल की कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि सप्लाई में रुकावट का डर है।


इससे ऊर्जा बाजार में हलचल आ सकती है और निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर अग्रसर हो सकते हैं।


सोने और चांदी की कीमतों में उछाल

साल 2026 की शुरुआत सोने के लिए सकारात्मक रही, जिसकी कीमत 1 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 4,370 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। यह वृद्धि वैश्विक तनाव और अमेरिका द्वारा ब्याज दरों में कमी की उम्मीद के कारण हुई।


चांदी की कीमत भी 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 73 डॉलर प्रति औंस हो गई, जो डॉलर की कमजोरी और फैक्ट्रियों में बढ़ती मांग के कारण संभव हुआ।


हालांकि, पिछले हफ्ते के दौरान सोने और चांदी में मुनाफावसूली भी हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगभग 5 प्रतिशत और चांदी की कीमत 8 प्रतिशत से अधिक गिर गई।


भारत में, एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स की कीमतों में हफ्ते की शुरुआत में तेज गिरावट देखी गई, जो पिछले दो महीनों की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतें एक निश्चित स्तर से ऊपर बनी रहती हैं, तो फिर से बढ़ सकती हैं। लेकिन यदि यह स्तर टूटता है, तो कीमतों में और गिरावट संभव है।


तेल की कीमतों में वृद्धि की संभावना

तेल की कीमतें भी साल की शुरुआत में बढ़ी हैं। डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल हफ्ते के अंत में लगभग 57.3 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। पिछले साल 2025 में तेल की कीमतें लगभग 20 प्रतिशत गिर गई थीं।


वेनेजुएला से जुड़ा तनाव और रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने तेल बाजार में जोखिम को बढ़ा दिया है।


साल की शुरुआत में बेस मेटल्स जैसे तांबा और एल्यूमीनियम की कीमतों में भी तेजी देखी गई। तांबा रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया और एल्युमिनियम 2022 के बाद पहली बार 3,000 डॉलर प्रति टन के पार चला गया। एशियाई बाजारों में मजबूत मांग ने इनकी कीमतों को सहारा दिया।