श्रीलंका में 25 लाख डॉलर की साइबर धोखाधड़ी, सरकार ने स्वीकार की गलती
श्रीलंका की वित्तीय चूक का मामला
श्रीलंका : आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका को एक नई समस्या का सामना करना पड़ा है। विदेशों से लिए गए कर्ज की किस्त चुकाने के दौरान वित्त मंत्रालय ने एक बड़ी गलती की, जिसके कारण 25 लाख डॉलर (लगभग 21 करोड़ रुपये) की राशि असली ऋणदाता के बजाय एक हैकर के खाते में चली गई। इस घटना के उजागर होने के बाद सरकार ने अपनी गलती को स्वीकार किया है और राशि को वापस लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
यह मामला तब सामने आया जब विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे को उठाया और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। श्रीलंकाई वित्त मंत्रालय के सचिव हर्षाना सुप्रियाप्पेरुमा ने बताया कि मंत्रालय के एक्सटर्नल रिसोर्सेज विभाग के सिस्टम में ईमेल के माध्यम से साइबर घुसपैठ की गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार को जनवरी में ही इस साइबर हमले की जानकारी मिल गई थी। उनके अनुसार, “हमें जनवरी में पता चला कि साइबर अपराधी वित्त मंत्रालय के सिस्टम में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद जिन देशों को भुगतान किया जाना था, उनसे संपर्क किया गया और स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया।”
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, श्रीलंका को ऑस्ट्रेलिया से लिए गए लगभग 2.29 करोड़ डॉलर के कर्ज का भुगतान करना था। इसी ऋण की दिसंबर महीने की किस्त के रूप में 25 लाख डॉलर भेजे गए थे, लेकिन यह राशि ऑस्ट्रेलिया सरकार के खाते में पहुंचने के बजाय एक हैकर द्वारा नियंत्रित बैंक खाते में ट्रांसफर हो गई। इस गंभीर मामले का खुलासा सबसे पहले श्रीलंका के विपक्ष ने किया। विपक्षी वकीलों के एक समूह ने संसद के स्पीकर को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकारी भुगतान गलत खाते में चला गया है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, यह कहते हुए कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा संसद की जिम्मेदारी है और इतनी बड़ी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह मामला संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) की कार्यवाही में भी उठाया गया, जहां अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। विपक्ष का कहना है कि यह केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। जब इस पूरे घटनाक्रम पर ऑस्ट्रेलिया की प्रतिक्रिया मांगी गई, तो श्रीलंका में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई हाई कमीशन ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी है। उच्चायोग ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ मिलकर इस स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रही है और धनराशि की रिकवरी पर काम जारी है।
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हैकर ने किस तरह ईमेल सिस्टम में सेंध लगाई, भुगतान प्रक्रिया को कैसे प्रभावित किया गया और क्या इसमें किसी अंदरूनी लापरवाही की भी भूमिका थी। एक समय गंभीर आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की भारी कमी और जनआंदोलन से जूझ चुके श्रीलंका के लिए यह घटना बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। ऐसे समय में जब देश अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विदेशी सरकारों का भरोसा दोबारा जीतने की कोशिश कर रहा है, इस तरह की साइबर चूक उसकी साख पर बड़ा असर डाल सकती है।
