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सरकार का बड़ा कदम: विदेशी निवेशकों को LTCG कर से मिली छूट

केंद्र सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए LTCG कर को समाप्त कर दिया है, जिससे भारतीय सरकारी बॉंड बाजार में निवेश बढ़ने की संभावना है। इस निर्णय का उद्देश्य रुपये को स्थिर करना और विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वित्तीय बाजारों में तरलता बढ़ेगी और सरकार को विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। जानें इस महत्वपूर्ण नीति परिवर्तन के बारे में और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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सरकार का बड़ा कदम: विदेशी निवेशकों को LTCG कर से मिली छूट

सरकार का नया अध्यादेश

नई दिल्ली: रुपये पर बढ़ते दबाव और विदेशी पूंजी के निरंतर पलायन के बीच, केंद्र सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को जारी एक अध्यादेश के माध्यम से, सरकार ने आयकर अधिनियम में संशोधन करते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में किए गए निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG) को समाप्त कर दिया है।


निवेश को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से भारतीय सरकारी बॉंड बाजार विदेशी निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनेगा, जिससे देश में दीर्घकालिक विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा। चूंकि सरकारी प्रतिभूतियां आमतौर पर लंबे समय तक निवेश के साधन होती हैं, इसलिए कर छूट का उद्देश्य स्थिर और टिकाऊ निवेश को बढ़ावा देना है।


पहले की कर दरें

इस अध्यादेश से पहले, विदेशी निवेशकों को इक्विटी और डेट निवेश से होने वाले दीर्घकालिक लाभ पर 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स चुकाना पड़ता था। जुलाई 2024 के बजट में यह दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत की गई थी।


भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर धन निकाला है। इससे न केवल पूंजी बाजार प्रभावित हुआ है, बल्कि भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बढ़ा है।


रुपये की कमजोरी

महंगे कच्चे तेल, बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के कारण रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिली है। विदेशी निवेशकों की निकासी और डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा दिया है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।


आरबीआई की भूमिका

रुपये को स्थिर रखने के लिए आरबीआई लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रहा है। डॉलर की बिक्री के चलते हाल के महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, आरबीआई ने कुछ दीर्घकालिक सरकारी बॉंड को पूरी तरह सुलभ श्रेणी (Fully Accessible Route) में शामिल कर विदेशी निवेशकों के लिए निवेश के रास्ते को और आसान बना दिया है।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि पूंजीगत लाभ कर से छूट मिलने के बाद विदेशी निवेशकों का शुद्ध रिटर्न बढ़ेगा, जिससे भारतीय सरकारी बॉंड बाजार में उनकी भागीदारी बढ़ सकती है। इससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह मजबूत होगा, वित्तीय बाजारों में तरलता बढ़ेगी और सरकार को बुनियादी ढांचा एवं विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।


निवेशकों का भरोसा

सरकार का यह कदम भारतीय वित्तीय बाजारों को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। इससे न केवल निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक विदेशी निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।