सर्दियों में टमाटर की फसल को सुरक्षित रखने के उपाय
टमाटर की फटने की समस्या और उसके प्रभाव
सर्दी के मौसम में टमाटर की खेती करने वाले किसानों को अक्सर फल फटने की समस्या का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी उपज का बाजार मूल्य घट जाता है। कृषि वैज्ञानिकों और राज्य कृषि विभाग ने इस नुकसान को कम करने के लिए कुछ वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपाय साझा किए हैं, ताकि किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त कर सकें।
टमाटर फटने की समस्या का महत्व
उत्तर भारत में टमाटर सबसे अधिक उगाई जाने वाली सब्जियों में से एक है। राज्य कृषि विभाग के अनुसार, फल फटने के कारण 10 से 20 प्रतिशत तक उपज बेकार हो सकती है। फटे हुए टमाटर मंडी में कम कीमत पर बिकते हैं या कई बार बिकते ही नहीं। इसीलिए, यह समस्या सीधे तौर पर किसानों की आय से जुड़ी हुई है।
फ्रूट क्रैकिंग के प्रमुख कारण
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी के अनुसार, टमाटर के फलों के फटने के पीछे दो मुख्य कारण होते हैं।
1. असंतुलित सिंचाई
जब खेत लंबे समय तक सूखा रहता है और अचानक अधिक पानी दिया जाता है, तो फल तेजी से बढ़ता है। इस दौरान, छिलका उतनी तेजी से फैल नहीं पाता और फल फट जाता है।
2. पोषक तत्वों की कमी
विशेषज्ञों का कहना है कि बोरॉन और कैल्शियम की कमी से टमाटर की त्वचा कमजोर हो जाती है। कमजोर छिलका तापमान में बदलाव या नमी बढ़ने पर आसानी से फट जाता है। इसके अलावा, सर्दियों में अचानक तापमान गिरने से भी यह समस्या बढ़ जाती है।
टमाटर की फसल को सुरक्षित रखने के उपाय
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय सुझाए हैं।
नियमित सिंचाई का पालन करें
खेत में नमी बनाए रखें और लंबे अंतराल के बाद अचानक भारी सिंचाई से बचें।
पोषक तत्वों का सही उपयोग
बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 10 किलो बोरेक्स पाउडर का भुरकाव करें। खड़ी फसल में प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम बोरॉन और 1 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट मिलाकर छिड़काव करें।
जल निकासी पर ध्यान दें
डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, जलभराव की स्थिति में जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पौधा तनाव में आता है और फल खराब होने लगते हैं। इसलिए खेत तैयार करते समय नालियों और जल निकासी की व्यवस्था जरूरी है।
विशेषज्ञों की राय
कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान पोषण और सिंचाई प्रबंधन को सही तरीके से अपनाएं, तो टमाटर की गुणवत्ता और आकार दोनों बेहतर होते हैं। इससे मंडी में बेहतर भाव मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
किसानों के लिए आगे की सलाह
स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से मिट्टी की जांच कराएं, मौसम पूर्वानुमान के आधार पर सिंचाई की योजना बनाएं, और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं।
यह सलाह क्यों महत्वपूर्ण है
यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे और मध्यम किसान अपनी सीमित लागत में अधिक मुनाफा तभी कमा सकते हैं, जब फसल का नुकसान कम हो। वैज्ञानिक सलाह अपनाकर टमाटर की खेती को ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी बनाया जा सकता है।
