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सर्दियों में हीटर के खतरनाक उपयोग से बढ़ रही मौतें

उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान हीटर और अंगीठी के उपयोग से कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में पंजाब, दिल्ली और कश्मीर में हुई मौतों ने इस समस्या को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कार्बन मोनोऑक्साइड एक खतरनाक गैस है, जो बिना चेतावनी के जान ले सकती है। इस लेख में हम इन घटनाओं, उनके कारणों और सुरक्षा उपायों पर चर्चा करेंगे, ताकि ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।
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सर्दियों में हीटर के खतरनाक उपयोग से बढ़ रही मौतें

सर्दियों में हीटर का खतरा

चंडीगढ़: उत्तर भारत में ठंड की तीव्रता ने लोगों को हीटर और अंगीठी का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया है, लेकिन लापरवाही के कारण ये उपकरण जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले महीने में कई राज्यों से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां लोग बंद कमरों में हीटर या अंगीठी जलाकर सोने के कारण दम घुटने या आग लगने से मारे गए। विशेषज्ञ इसे कार्बन मोनोऑक्साइड के खामोश हमले के रूप में देख रहे हैं, जो बिना किसी चेतावनी के जान ले सकता है.


पंजाब में त्रासदी

हाल ही में पंजाब के तरनतारन में एक दुखद घटना घटी, जहां 21 वर्षीय अरशदीप सिंह, उनकी पत्नी जसंदीप कौर और एक महीने का बच्चा गुरबाज सिंह बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सो गए। सुबह तीनों की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में दम घुटने और जहरीली गैस को मौत का कारण बताया गया है। कमरे की सभी खिड़कियां और दरवाजे बंद थे, जिससे गैस बाहर नहीं निकल सकी.


दिल्ली और बिहार में भी हुईं मौतें

दिल्ली के मुकुंदपुर में डीएमआरसी के इंजीनियर अजय विमल, उनकी पत्नी नीलम और 10 साल की बेटी जाह्नवी की आग लगने से जान चली गई। पुलिस को संदेह है कि रूम हीटर में शॉर्ट सर्किट या विस्फोट हुआ। वहीं, बिहार के गया में एक वृद्धा मीना देवी और उनके दो नाती-पोतों की अंगीठी से दम घुटने से मौत हो गई.


कश्मीर घाटी में भी बढ़ी समस्याएं

श्रीनगर में एक किराए के कमरे में शेफ एजाज अहमद भट, उनकी पत्नी और तीन बच्चों के शव मिले। कमरे में इलेक्ट्रिक ब्लोअर था। अधिकारियों का मानना है कि बंद कमरे में लंबे समय तक हीटर चलने से दम घुटने की घटना हुई। मृत बच्चों में एक केवल 28 दिन का था। ठंड से बचने की कोशिश पूरे परिवार के लिए घातक साबित हुई.


कार्बन मोनोऑक्साइड: साइलेंट किलर

डॉक्टरों के अनुसार, कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस है। श्रीनगर के चेस्ट डिजीज हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. नवीन नजीर शाह बताते हैं कि कोयला, लकड़ी या गैस से चलने वाले उपकरण बंद कमरे में ऑक्सीजन खत्म कर देते हैं। पीड़ित को पहले चक्कर, सिरदर्द और थकान होती है, फिर वह बेहोश हो जाता है और जान चली जाती है.


विशेषज्ञों की सलाह

एम्स दिल्ली के एक अध्ययन में पाया गया कि 95 प्रतिशत कार्बन मोनोऑक्साइड से होने वाली मौतें सर्दियों में होती हैं। डॉक्टर अम्बरीश गर्ग के अनुसार, हीटर हवा की नमी को भी खत्म करता है, जिससे सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि हीटर के साथ खिड़की खुली रखें, पूरी रात हीटर न चलाएं, कमरे में पानी रखें, CO सेंसर लगाएं और उपकरणों की नियमित सर्विस कराएं.