साइप्रस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की जताई इच्छा, तुर्की में मची खलबली
भारत का ब्रह्मोस: वैश्विक सुरक्षा में एक नया अध्याय
भारत की ब्रह्मोस मिसाइल, जिसे 'ब्रह्मास्त्र' के नाम से भी जाना जाता है, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को मात देने के बाद इस मिसाइल की मांग में तेजी आई है। कई देशों ने भारत के साथ इस मिसाइल की खरीद के लिए समझौते किए हैं, जबकि अन्य देश इस दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी में हैं। हाल ही में साइप्रस ने भी भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और स्वदेशी कामिकेज ड्रोन खरीदने की इच्छा व्यक्त की है। इस सौदे से तुर्की में चिंता का माहौल है।
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की भारत यात्रा के दौरान इस रक्षा सौदे की रूपरेखा तैयार की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स के बीच एक रक्षा सहयोग रोडमैप पर सहमति बनी, जिसमें दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, खोज एवं बचाव अभियान और रक्षा प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान शामिल है।
तुर्की की चिंता का कारण
इस रक्षा सौदे के साथ, भूमध्य सागर में भारतीय हथियार प्रणाली की पहली तैनाती होगी, जो तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। तुर्की ने उत्तरी साइप्रस पर दशकों से अवैध कब्जा कर रखा है, और साइप्रस में ब्रह्मोस की तैनाती तुर्की के लिए चिंता का विषय है। यदि भारत की ब्रह्मोस मिसाइलें भूमध्य सागर में तैनात होती हैं, तो इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन में बड़ा बदलाव आएगा।
पाकिस्तान की चिंता
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया था, और इस्मालिक भाईचारे के नाम पर उसने पाकिस्तान को कई ड्रोन भेजे थे। हालांकि, भारत ने इन ड्रोन को मार गिराया और पाकिस्तान के हमलों का प्रभावी जवाब दिया। तुर्की ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाया है, जिससे पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई है।
