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साइबर ठगी से बचें: FASTag रिचार्ज करते समय रखें इन बातों का ध्यान

FASTag रिचार्ज करते समय साइबर ठगी का खतरा बढ़ गया है। गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि कई फर्जी वेबसाइटें सक्रिय हैं, जो उपयोगकर्ताओं को धोखा दे रही हैं। इस लेख में जानें कि कैसे आप अपनी मेहनत की कमाई को ठगों से बचा सकते हैं और नकली वेबसाइटों की पहचान कर सकते हैं। सही जानकारी और सतर्कता से आप इस खतरे से बच सकते हैं।
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साइबर ठगी से बचें: FASTag रिचार्ज करते समय रखें इन बातों का ध्यान

नई दिल्ली में साइबर ठगी का नया मामला

नई दिल्ली: यदि आप अपनी कार या अन्य वाहनों का FASTag ऑनलाइन रिचार्ज करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है। टोल प्लाजा पर लंबी कतारों से बचने के लिए उपयोगी FASTag अब साइबर अपराधियों का नया शिकार बन गया है। एक छोटी सी चूक से आपका पैसा सीधे ठगों के खाते में जा सकता है, जिससे आप बिना बैलेंस के हाईवे पर फंस सकते हैं।


गृह मंत्रालय की एजेंसी ने किया खुलासा

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत साइबर सुरक्षा एजेंसी 'साइबर दोस्त' ने इस धोखाधड़ी के बारे में एक चेतावनी जारी की है। इसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें बताया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के नाम से कई फर्जी वेबसाइटें सक्रिय हैं। जब कोई उपयोगकर्ता FASTag रिचार्ज या एनुअल पास के लिए सर्च करता है, तो ये वेबसाइटें उन्हें अपने जाल में फंसा लेती हैं।


आपकी मेहनत की कमाई सीधे ठगों के पास

इन नकली वेबसाइटों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे असली लगें। जब आप इन पर जाकर भुगतान करते हैं, तो आपका पैसा आपके FASTag खाते में नहीं जाता, बल्कि सीधे ठगों के बैंक खाते में चला जाता है। आपको तब तक इस धोखे का पता नहीं चलता जब तक आप टोल प्लाजा पर नहीं पहुंचते।


नकली वेबसाइटों की पहचान कैसे करें

सरकारी एजेंसी ने बताया है कि इस धोखाधड़ी से बचने के लिए आपको सतर्क रहना होगा। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उस वेबसाइट का URL और स्पेलिंग को ध्यान से जांचें। फर्जी वेबसाइटों में अक्सर स्पेलिंग की गलतियां होती हैं और उनकी तस्वीरें धुंधली होती हैं। हमेशा NHAI के आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें या अपने स्मार्टफोन में 'राजमार्ग यात्रा ऐप' का इस्तेमाल करें।