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सीआईए की फेक फिल्म: ईरान में फंसे अमेरिकियों को बचाने की कहानी

सीआईए ने 1979 में ईरान में फंसे 6 अमेरिकियों को बचाने के लिए एक अनोखी योजना बनाई। इस योजना के तहत, एक फेक फिल्म 'आर्गो' बनाई गई, जिसमें एक मास्टरप्लान के जरिए इन अमेरिकियों को सुरक्षित निकाला गया। जानें इस दिलचस्प कहानी के बारे में, जिसमें जासूसी, साहस और सच्चाई का मिश्रण है।
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सीआईए की फेक फिल्म: ईरान में फंसे अमेरिकियों को बचाने की कहानी

ऑस्कर विजेता फिल्म की कहानी


America-Iran War Film, मुंबई: हॉलीवुड में युद्ध और जासूसी फिल्मों की भरमार है, और ऐसी फिल्मों को दर्शकों द्वारा काफी सराहा जाता है। आज हम आपको एक विशेष फिल्म के बारे में बताएंगे, जो 2012 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का नाम 'आर्गो' है, जिसे 85वें ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। यह फिल्म एक ऐसे मिशन को दर्शाती है, जिसने अमेरिकी खुफिया और इंटेलिजेंस के इतिहास में एक नया मापदंड स्थापित किया।


ईरानी जनता का अमेरिकी दूतावास पर हमला

1979 में, तेहरान के अमेरिकी दूतावास पर ईरानी जनता ने हमला कर दिया। इस अफरा-तफरी में, 6 अमेरिकी राजदूत वहां से भागकर एक कनाडाई राजदूत के घर में शरण लेते हैं। वहीं, दूतावास में बाकी सभी लोग बंधक बन जाते हैं। ईरान में स्थिति बिगड़ने लगती है और लोग इन 6 अमेरिकियों को खोजने लगते हैं। इस बीच, सीआईए इन लोगों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाती है।


सीआईए की बचाव योजना

सीआईए दो अलग-अलग ऑपरेशनों की योजना बनाती है, जिसमें बंधक बने लोगों और 6 राजदूतों को अलग-अलग बचाने का प्रयास किया जाता है। इस मिशन की जिम्मेदारी एक कुशल एजेंट टोनी मेंडेज को दी जाती है, जो एक मास्टरप्लान तैयार करता है।


फेक फिल्म का निर्माण

टोनी एक साई-फाई फिल्म 'आर्गो' बनाने के बहाने ईरान में घुसने की योजना बनाता है। वह सभी 6 लोगों को कनाडा के पासपोर्ट और फिल्म क्रू की पहचान पर वहां से निकालने के लिए राजी कर लेता है। इसके लिए, टोनी एक प्रोड्यूसर की मदद लेता है और एक फेक स्टूडियो से लेकर फिल्म बनाने का सारा सामान जुटाता है।


फिल्म में लीड रोल

क्या मिशन सफल होता है? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी। फिल्म में मुख्य भूमिका में बेन एफ्लेक और जैक ओ डानियल हैं। अन्य सभी कलाकारों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यह कहानी असली मिशन 'कनाडाई केपर' पर आधारित है।


फिल्म की वास्तविकता

टोनी ने उन 6 लोगों को फिल्म से जुड़ी हर जानकारी के लिए तैयार किया था, ताकि जांच के दौरान वे पकड़े न जाएं। फिल्म आपको अंत तक बांधे रखती है और इसकी कहानी और निर्देशन आपको एक पल के लिए भी बोर नहीं होने देते।