सीएम योगी ने नए लेखा परीक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे, उत्तर प्रदेश में बदलावों पर की चर्चा
मुख्यमंत्री का संबोधन
उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में सहकारी समितियों और पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के नव चयनित लेखा परीक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में हुए परिवर्तनों पर प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि बदलते भारत के साथ उत्तर प्रदेश का विकास भी सभी के सामने है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले और बाद के उत्तर प्रदेश में स्पष्ट अंतर है। उन्होंने बताया कि किसी भी सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना होता है, और प्रदेश सरकार ने इन दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) May 4, 2026
उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय प्रबंधन में सुधार नहीं होता और बिना बजट के खर्च करने की प्रवृत्ति जारी रहती, तो उत्तर प्रदेश कभी भी राजस्व सरप्लस राज्य नहीं बन पाता। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश को बीमारू राज्य माना जाता था और कोई भी बैंक कर्ज देने के लिए तैयार नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी सरकार 2017 में आई, तब खजाने की स्थिति बहुत कमजोर थी। यहां तक कि बैंक के चेयरमैन और सीएमडी भी फोन उठाने को तैयार नहीं होते थे। उस समय हमने निर्णय लिया कि बिना कर्ज लिए वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने बताया कि सरकार ने वित्तीय प्रबंधन को मजबूत किया और बिना बाहरी कर्ज के कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे किए। उदाहरण के लिए, उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे का उल्लेख किया, जो लगभग 600 किलोमीटर लंबा है और जिसकी लागत 36,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस एक्सप्रेसवे के साथ 9 औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब भी विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए लगभग 7,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई है। उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट पर कुल मिलाकर करीब 42,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो रहा है। कार्यक्रम के अंत में, मुख्यमंत्री ने नव नियुक्त लेखा परीक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
