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सुखजिंदर रंधावा ने डीए के फैसले का किया स्वागत, पंजाब सरकार से बकाया जारी करने की मांग

कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते के अधिकार को बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने पंजाब सरकार से बकाया राशि तुरंत जारी करने की मांग की, यह कहते हुए कि डीए कर्मचारियों का अधिकार है। रंधावा ने महंगाई के कारण कर्मचारियों की कठिनाइयों पर भी प्रकाश डाला और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो असंतोष बढ़ सकता है।
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सुखजिंदर रंधावा ने डीए के फैसले का किया स्वागत, पंजाब सरकार से बकाया जारी करने की मांग

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

चंडीगढ़ - कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) के अधिकार को बनाए रखने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत का स्रोत है, जो लंबे समय से अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे थे।


डीए का अधिकार और सरकार की जिम्मेदारी

रंधावा ने स्पष्ट किया कि डीए कर्मचारियों का अधिकार है, न कि कोई दान। उन्होंने भगवंत मान सरकार से आग्रह किया कि वह तुरंत डीए की बकाया राशि जारी करे। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने कर्ज लिया है, और इसी कर्ज से कर्मचारियों का डीए जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि वह बार-बार स्टे लेने की कोशिशें न करे और अदालत के फैसले का सम्मान करे।


महंगाई और कर्मचारियों की स्थिति

रंधावा ने कहा कि वर्तमान में बढ़ती महंगाई ने वेतनभोगी वर्ग की आर्थिक स्थिति को कठिन बना दिया है। रोजमर्रा के खर्च, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं पर बढ़ते बोझ के कारण कर्मचारी और पेंशनर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में डीए की राशि उनके लिए एक महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकती है।


सरकार को प्राथमिकता देनी चाहिए

उन्होंने पंजाब सरकार से आग्रह किया कि हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा का इंतजार करने के बजाय कर्मचारियों और पेंशनरों की बकाया राशि तुरंत जारी की जाए। रंधावा ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि यही वर्ग प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है।


संभावित असंतोष की चेतावनी

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो असंतोष बढ़ सकता है। कर्मचारी संगठनों ने भी हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए जल्द भुगतान की मांग की है।