सुप्रीम कोर्ट का एसआईआर पर महत्वपूर्ण निर्णय
निर्वाचन आयोग को एसआईआर का अधिकार
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एसआईआर से संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने का अधिकार है, जो निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक दायित्व को पूरा करता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटाना यह नहीं दर्शाता कि कोई व्यक्ति नागरिक नहीं है।
नागरिकता की स्थिति की जांच का अधिकार
अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग को केवल मतदाता सूची में पात्रता निर्धारित करने के लिए नागरिकता की स्थिति की जांच करने का अधिकार है। पीठ ने यह भी कहा, 'लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता मतदाता सूची की सटीकता पर निर्भर करती है। हम इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते कि विवादित प्रक्रिया केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए अपनाई गई थी।'
निर्वाचन आयोग को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी कि निर्वाचन आयोग ने अपनी वैधानिक शक्तियों का दुरुपयोग किया। मताधिकार से वंचित होने की स्थिति को रोकने के लिए, अदालत ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि नागरिकता के आधार पर हटाए गए सभी नामों के मामले चार सप्ताह के भीतर नागरिकता अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी को भेजे जाएं। सक्षम प्राधिकारी को अगले विधानसभा या निकाय चुनावों से पहले नागरिकता संबंधी निर्णय देना होगा। यदि सक्षम प्राधिकारी संबंधित व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टि करता है, तो उसका नाम तुरंत मतदाता सूची में बहाल किया जाएगा।
बिहार और बंगाल में चुनावी मुद्दा
बिहार और बंगाल में विधानसभा चुनावों के दौरान विपक्षी दलों ने एसआईआर को चुनावी मुद्दा बनाते हुए चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए थे। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर आयोग और सरकार की मिलीभगत का आरोप लगाया गया। उच्चतम न्यायालय का यह आदेश विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा झटका है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ
देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर विपक्षी दलों की टिप्पणियाँ आ रही हैं, जो उचित नहीं मानी जा सकतीं। देश के 19 राज्यों में मतदाता सूचियों की पुनरीक्षण प्रक्रिया चल रही है, और अब चुनाव आयोग इसे आसानी से पूरा कर सकेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 'आयोग मतदाताओं के साथ था, है और रहेगा।'
सकारात्मक नीति की आवश्यकता
राजनीतिक दलों को एसआईआर के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक नीति अपनानी चाहिए। इससे चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण में सहयोग मिलेगा, जिससे मतदाता को उसका हक मिलेगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी।
