सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: EPF वेतन सीमा बढ़ाने का निर्देश
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली - नौकरीपेशा लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत की सूचना आई है। यदि आपकी सैलरी 15,000 रुपये से थोड़ी अधिक है और आप ईपीएफ (EPF) के दायरे से बाहर हैं, तो अब आपको उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वेतन सीमा (वेज सीलिंग) को बढ़ाने पर चार महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए।
वेतन सीमा में बदलाव की आवश्यकता
यह आदेश उस वेतन सीमा के संदर्भ में है, जो पिछले 11 वर्षों से अपरिवर्तित है। अदालत ने यह माना कि लंबे समय से इस सीमा में बदलाव न होने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी ईपीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित रह रहे हैं।
जनहित याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह आवश्यक है कि वेतन सीमा को बढ़ाने पर निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने केंद्र और EPFO को इस मुद्दे पर समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
11 वर्षों से स्थिर वेतन सीमा
वेतन सीमा क्यों अटकी है?
वर्तमान में ईपीएफ के तहत वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रति माह निर्धारित है। जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर यह राशि 15,000 रुपये तक है, उनके लिए पीएफ कटौती अनिवार्य है। यह सीमा सितंबर 2014 में तय की गई थी और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पर प्रभाव
सोशल सिक्योरिटी से वंचित कर्मचारी
याचिका में यह कहा गया है कि मौजूदा नियमों के कारण बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग ईपीएफ जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना से बाहर हो गए हैं। ईपीएफ का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, लेकिन पुरानी वेतन सीमा इस उद्देश्य को कमजोर कर रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही इस पर निर्णय लेगी और वेतन सीमा बढ़ने से अधिक कर्मचारियों को पीएफ का लाभ मिल सकेगा।
