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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म परिवर्तन से अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा। यह फैसला उन लोगों पर सीधा असर डालेगा जो धर्म परिवर्तन के बाद भी सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन के तुरंत बाद अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाएगा। जानें इस फैसले के पीछे के कानूनी पहलुओं और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय की पुष्टि के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म परिवर्तन से अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे और धर्मांतरण से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा। इस फैसले का सीधा प्रभाव उन व्यक्तियों पर पड़ेगा जो धर्म परिवर्तन के बाद भी सरकारी सुविधाओं और आरक्षण का लाभ ले रहे हैं।


धर्म परिवर्तन का तात्कालिक प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह कठोर निर्णय सुनाया। पीठ ने स्पष्ट किया कि जैसे ही कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करता है, उसका अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है। अदालत ने कहा कि ऐसा व्यक्ति भविष्य में अनुसूचित जाति के तहत किसी भी प्रकार के लाभ या अधिकार का दावा नहीं कर सकता।


संविधान के आदेश का संदर्भ

इस निर्णय का आधार बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 का हवाला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1950 के आदेश के क्लॉज 3 में उल्लिखित धर्मों (हिंदू, सिख और बौद्ध) के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने पर अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है। न्यायालय ने कहा कि कोई भी व्यक्ति एक साथ किसी अन्य धर्म का पालन करते हुए अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा नहीं कर सकता। इस नियम में कोई अपवाद नहीं है और धर्म परिवर्तन करने वाला व्यक्ति संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के तहत आरक्षण या वैधानिक लाभ नहीं ले सकता।


आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले की पुष्टि

यह विवाद आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक निर्णय से संबंधित है, जिसे चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस पुराने फैसले को सही ठहराया है, जिसमें कहा गया था कि जो लोग ईसाई धर्म अपनाते हैं और सक्रिय रूप से उसका पालन करते हैं, वे अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा नहीं रख सकते। सर्वोच्च अदालत की इस पुष्टि के बाद अब यह नियम पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है।