सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: दहेज उत्पीड़न के मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर पति के रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता। न्यायाधीशों ने कहा कि किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए ठोस और स्पष्ट सबूत होना आवश्यक है।
धारा 498ए के दुरुपयोग पर चिंता
सर्वोच्च न्यायालय ने शादीशुदा महिलाओं के प्रति क्रूरता और उत्पीड़न से संबंधित धारा 498ए के दुरुपयोग पर भी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इस कानून का उपयोग बिना ठोस सबूत के पति के परिवार को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश का मामला
यह मामला मध्य प्रदेश के गुना जिले से संबंधित है, जहां एक महिला ने अपने पति और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और मानसिक क्रूरता का आरोप लगाया था। पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पति के परिवार के सदस्यों के खिलाफ मामला रद्द करने से इनकार कर दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को पलटते हुए रिश्तेदारों के खिलाफ सभी कानूनी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। यह महत्वपूर्ण निर्णय जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया।
महिला के आरोप
महिला की शादी नवंबर 2019 में हुई थी। जनवरी 2023 में उसने आईपीसी की धारा 498ए, धारा 34 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत एफआईआर दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि शादी में भारी दहेज दिया गया था और उसके ससुराल वालों ने दहेज की मांग की और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने इमोशनल एब्यूज, निगरानी, आने-जाने पर पाबंदी और लाइसेंसी बंदूक से डराने-धमकाने जैसे कई आरोप लगाए।
निचली अदालतों के लिए सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में पति के परिवार के हर सदस्य को आरोपी बनाना एक सामान्य प्रथा बन गई है। जजों ने निचली अदालतों को सलाह दी कि वे रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से पहले मामलों की गहराई से जांच करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति का समर्थन करना या विवाद में दखल न देना आपराधिक व्यवहार नहीं है। बिना मजबूत सबूतों के रिश्तेदारों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इस निर्णय से उन निर्दोष लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें वैवाहिक विवादों में झूठे आरोपों का सामना करना पड़ता है।
