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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की है, जो नौकरी न मिलने पर समाज पर हमला करते हैं। यह टिप्पणी एक वकील की सीनियर एडवोकेट बनने की याचिका के दौरान की गई। CJI ने कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता पर भी चिंता जताई और कहा कि कई वकीलों की डिग्रियां संदिग्ध हैं। जानें इस विवादास्पद सुनवाई के बारे में और क्या कहा गया।
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की

सुप्रीम कोर्ट में विवादास्पद टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की। उन्होंने कहा कि जो युवा नौकरी पाने में असफल रहते हैं और अपने पेशे में स्थान नहीं बना पाते, वे मीडिया, सोशल मीडिया, RTI या अन्य एक्टिविस्ट बनकर समाज पर हमला करने लगते हैं।


सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी

यह टिप्पणी उस समय की गई जब सुप्रीम कोर्ट में एक वकील द्वारा सीनियर एडवोकेट बनने की याचिका पर सुनवाई चल रही थी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।


जस्टिस सूर्यकांत की चेतावनी

CJI सूर्यकांत ने कहा, 'समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं। क्या आप उन्हीं के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं? कुछ युवा, जिन्हें न रोजगार मिलता है और न ही किसी पेशे में स्थान, मीडिया या सोशल मीडिया में चले जाते हैं और हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं। आप लोग अवमानना याचिकाएँ दायर करते हैं।'


सीनियर एडवोकेट का दर्जा

बेंच ने याचिकाकर्ता वकील को स्पष्ट किया कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा अदालत द्वारा दिया जाता है, इसे चुनौती नहीं दी जा सकती। CJI ने कहा, 'पूरी दुनिया सीनियर बनने के योग्य हो सकती है, लेकिन आप नहीं।'


कानूनी शिक्षा पर चिंता

सुनवाई के दौरान, CJI ने कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई वकीलों की डिग्रियों की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए क्योंकि कई डिग्रियां संदिग्ध हैं। बेंच ने यह भी कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस पर कार्रवाई नहीं करती क्योंकि उन्हें वोटों की आवश्यकता होती है। अंत में, याचिकाकर्ता ने अदालत से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।