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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुइयां की न्यायपालिका पर तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां ने हाल ही में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने जमानत न मिलने की बढ़ती प्रवृत्ति और UAPA जैसे कठोर कानूनों पर चिंता व्यक्त की। जस्टिस भुइयां ने कहा कि कुछ जज 'राजा से भी ज्यादा वफादार' हो गए हैं, जिससे आम जनता को नुकसान हो रहा है। उन्होंने असहमति को अपराध न मानने और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। जानें उनके विचारों के बारे में और अधिक।
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुइयां की न्यायपालिका पर तीखी टिप्पणी

जमानत न मिलने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां ने हाल ही में न्यायपालिका, मुकदमों के बोझ और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने रविवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस 2026 में जमानत न मिलने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। जस्टिस भुइयां ने कहा कि कुछ जज 'राजा से भी ज्यादा वफादार' होने की मानसिकता से ग्रसित हो गए हैं। इस सोच के कारण वे सही मामलों में भी आरोपियों को जमानत नहीं देते, जिससे आम जनता को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ता है।


विकसित भारत में असहमति का महत्व

‘विकसित भारत में असहमति कोई अपराध नहीं’

सम्मेलन में 'विकसित भारत में न्यायपालिका की भूमिका' पर बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि एक विकसित समाज में असहमति और स्वस्थ बहस के लिए जगह होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी विचार से असहमत होना अपराध नहीं है और समाज में विभिन्न विचारों के प्रति सहनशीलता बढ़ानी चाहिए। उन्होंने सामाजिक बुराइयों पर भी प्रहार करते हुए कहा कि विकसित भारत में यह अस्वीकार्य है कि माता-पिता अपने बच्चों को दलितों द्वारा बनाए गए भोजन से दूर रखें।


बेतुकी एफआईआर से न्यायपालिका का समय बर्बाद

मीम्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर FIR से बर्बाद हो रहा समय

जस्टिस भुइयां ने अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि बेतुकी अपीलें और बेबुनियाद एफआईआर इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में आपराधिक मामलों में एफआईआर बहुत लापरवाही से दर्ज की जा रही हैं। छात्रों के प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर मीम्स जैसी छोटी-छोटी बातों पर भी तुरंत एफआईआर दर्ज की जाती है, जिससे पुलिस की लंबी जांच होती है।


UAPA की कठोरता पर जस्टिस भुइयां की टिप्पणी

UAPA को बताया कठोर कानून, खोले गिरफ्तारी के आंकड़े

अपने संबोधन में जस्टिस भुइयां ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) का जिक्र करते हुए इसे एक कठोर कानून बताया। उन्होंने गृह मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2019 में इस कानून के तहत 1984 लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन केवल 34 को ही दोषी ठहराया गया। इसी तरह 2020 में 1321 गिरफ्तारियों में से केवल 80 को दोषी साबित किया गया। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि बिना ठोस सबूत के जल्दबाजी में गिरफ्तारियां की जा रही हैं, जिससे निर्दोष लोगों को परेशानी होती है।