सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नागरिकों का पत्र अभियान
नई दिल्ली में नागरिकों का विरोध
नई दिल्ली: देशभर में पशु संरक्षण से जुड़े नागरिकों और संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के खिलाफ एक बड़ा पत्र अभियान शुरू किया है, जिसमें कम्युनिटी कुत्तों को संस्थागत क्षेत्रों से हटाने के निर्देश पर पुनर्विचार की मांग की गई है। आयोजकों के अनुसार, दिल्ली से लगभग 10,000 लोगों ने हाथ से लिखे पत्र भेजे, जबकि पूरे भारत से 50,000 से अधिक पत्र सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए हैं।
अभियान का उद्देश्य
7 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे संस्थागत क्षेत्रों, जैसे कार्यालयों, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संस्थानों से कम्युनिटी कुत्तों को हटाएं। इस आदेश को कई नागरिकों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने 'मानव-पशु सह-अस्तित्व के खिलाफ' बताया। इसी के विरोध में यह देशव्यापी पत्र अभियान शुरू किया गया।
नागरिकों की भागीदारी
आयोजकों ने देशभर के लोगों से अपील की कि वे 29 नवंबर को अपने नजदीकी पोस्ट ऑफिस जाकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को संबोधित पत्र भेजें। इन पत्रों में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया कि आदेश पर रोक लगाएं, इसे वापस लें और मामले पर पुनर्विचार करें। इस अभियान का नेतृत्व प्रसिद्ध पशु कल्याण कार्यकर्ता अंबिका शुक्ला कर रही हैं।
देशभर में सक्रियता
रिलीज में कहा गया कि लखनऊ के जीपीओ समेत कई शहरों में छात्र, नौकरीपेशा और अन्य नागरिक लंबी लाइनों में खड़े होकर अपने पत्र भेज रहे थे। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, इंफाल, वडोदरा, चेन्नई जैसे शहरों में हजारों लोग इस अभियान में शामिल हुए। आयोजकों ने बताया कि शनिवार शाम तक उनकी वेबसाइट पर 50,000 से अधिक पोस्टल रसीदें अपलोड हो चुकी थीं, जो लोगों की व्यापक भागीदारी को दर्शाती हैं।
एक्टिविस्टों की प्रतिक्रिया
अभियान में शामिल एक पशु अधिकार कार्यकर्ता कुणाल ने बताया कि उन्होंने लोगों के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों में पत्र टेम्पलेट उपलब्ध कराए थे, लेकिन वास्तविक भागीदारी उम्मीद से कहीं अधिक रही। उन्होंने कहा कि लोगों की संवेदनशीलता और जानवरों की भलाई की चिंता इस अभियान में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। हाथ से लिखा गया पत्र ईमानदारी और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। कुणाल के अनुसार, अब तक 10,000 से अधिक पत्र जमा किए जा चुके हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
