सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल से अलग रह रहे दंपति के तलाक को मान्यता दी
शारीरिक संबंधों की अनुपस्थिति को तलाक का आधार माना गया
यदि आप विवाहित हैं और लंबे समय से आपके बीच शारीरिक संबंध नहीं बने हैं, तो इसे तलाक का वैध कारण माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने एक डॉक्टर दंपति के 15 साल पुराने रिश्ते को समाप्त करने का निर्णय लिया, क्योंकि दोनों ने 15 वर्षों से अलग-अलग जीवन व्यतीत किया। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक यौन संबंधों से इनकार करना पति के लिए क्रूरता का संकेत है.
कोर्ट का निर्णय
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि पति द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि जब यौन संबंध बनते थे, तब पत्नी अक्सर जल्दी सो जाती थीं, दरवाजा बंद कर लेती थीं, और पति के बार-बार खटखटाने पर भी दरवाजा नहीं खोलती थीं, जिसके कारण पति को अलग कमरे में सोना पड़ता था.
'भावनात्मक क्रूरता का मामला'
पत्नी ने अदालत में पति के आरोपों का खंडन नहीं किया। यह निर्णय 2 जून को सुनाया गया। भारत की विभिन्न अदालतों ने बार-बार कहा है कि विवाह के दौरान यौन संबंधों से इनकार करने से भावनात्मक पीड़ा होती है, जो विवाह के बंधन को प्रभावित करती है.
दंपति का परिचय
यह दंपति 5 दिसंबर 2007 को गुजरात में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह बंधन में बंधा था। उनके कोई संतान नहीं थी। विवाह के समय पत्नी एक सरकारी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ थीं, जबकि पति राजस्थान में सरकारी डॉक्टर थे.
तलाक की प्रक्रिया
पति ने 2009 में फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पति अपने आरोपों को साबित करने में असफल रहा। बाद में, पति ने हाई कोर्ट में अपील की, जिसने 2025 में पति के पक्ष में निर्णय सुनाया.
पत्नी का पक्ष
पत्नी ने तर्क दिया कि वह हमेशा विवाह को बनाए रखने की इच्छुक थीं और उन्होंने पति के साथ क्रूरता का व्यवहार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि पति उनके खिलाफ आरोपों को साबित करने में असफल रहे हैं.
पति का तर्क
पति का कहना है कि पत्नी ने विवाह को बचाने की कोई कोशिश नहीं की। दोनों पक्ष 15 वर्षों से अलग रह रहे थे। पति ने कहा कि पत्नी ने कई बार यौन संबंध बनाने से इनकार किया, जो क्रूरता का मामला है. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जोर दिया कि डेढ़ दशक तक बिना यौन संबंधों के रहना इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू है.
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाह के मामलों का लंबे समय तक लंबित रहना केवल कागजों पर विवाह को स्थायी बनाता है। कोर्ट ने कहा कि दंपति लंबे समय से अलग रह रहे हैं और अब उनके बीच विवाह की कोई पवित्रता नहीं बची है. कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह को समाप्त करने का निर्णय लिया और पत्नी की अपील को खारिज कर दिया.
