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सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन के मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो सकती है और इस पर सख्त कदम उठाते हुए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। राजस्थान सरकार ने अवैध खनन को रोकने का आश्वासन दिया है। जानें इस महत्वपूर्ण मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट की गंभीर चेतावनी

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन के मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि यह पर्यावरण को गंभीर और अपूरणीय नुकसान पहुंचा सकता है। इस विषय पर सख्त कदम उठाते हुए, कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में खनन और उससे संबंधित सभी पहलुओं की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्णय लिया है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अवैध खनन न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बड़ा खतरा है। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को निर्देश दिए हैं कि वे चार सप्ताह के भीतर खनन से संबंधित मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाएं, ताकि एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके। यह समिति सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कार्य करेगी।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अरावली क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में अवैध खनन की गतिविधियाँ चल रही हैं। इस पर राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य में किसी भी प्रकार का अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और श्रेणियों की एक समान परिभाषा को लेकर 20 नवंबर को दिए गए अपने आदेश को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय भी बरकरार रखा है। अदालत ने पहले कहा था कि नई परिभाषा में कुछ गंभीर अस्पष्टताएं हैं, जिनका समाधान आवश्यक है।

यह ध्यान देने योग्य है कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैली अरावली पर्वतमाला में नई खनन लीज जारी करने पर रोक लगा दी थी। यह रोक विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक लागू की गई थी। यह निर्णय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक अरावली का संरक्षण करना है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की जाने वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही अरावली क्षेत्र में खनन और संरक्षण से जुड़े आगे के निर्णय लिए जाएंगे।