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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में अर्जियों की संख्या पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों में दाखिल हो रही अर्जियों की अत्यधिक संख्या पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में अर्जियां आमतौर पर मानव मामलों में भी नहीं देखी जातीं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने इस स्थिति को न्यायिक प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव डालने वाला बताया। अगली सुनवाई बुधवार को होगी, जिसमें सभी संबंधित अर्जियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। यह मामला जन स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा से भी जुड़ा है, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में अर्जियों की संख्या पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों में दाखिल हो रही इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशंस की अत्यधिक संख्या पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में अर्जियां आमतौर पर मानव मामलों में भी नहीं देखी जातीं। यह टिप्पणी उस समय आई जब सुनवाई के दौरान वकीलों ने अतिरिक्त अर्जियों का जिक्र किया।


अदालत की चिंता

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जरूरत से ज्यादा अर्जियां प्रस्तुत की जा रही हैं। जस्टिस मेहता ने कहा कि यह स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव डालती है और इससे मुख्य मुद्दे पर निर्णय लेने में देरी होती है।


अगली सुनवाई का समय

वकीलों ने ट्रांसफर याचिका पर तात्कालिक सुनवाई की मांग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मामला पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को सुना जाएगा। अदालत ने आश्वासन दिया कि सभी संबंधित अर्जियों पर उसी दिन विस्तार से सुनवाई की जाएगी और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।


मामले की पृष्ठभूमि

आवारा कुत्तों से जुड़ा यह मामला 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद चर्चा में आया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के कई शहरों में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बच्चों में रेबीज के मामलों में वृद्धि देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में हर साल हजारों रेबीज से संबंधित मौतें होती हैं, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की होती है।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों का तुरंत स्टेरिलाइजेशन और वैक्सीनेशन किया जाए, उन्हें निर्धारित शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाए, और इन्हें उसी स्थान पर वापस न छोड़ा जाए जहां से पकड़ा गया था।


प्रशासन की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संस्थागत परिसरों में बार-बार कुत्तों के काटने की घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती हैं। शहरी प्रशासन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय निकाय समय पर नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम लागू करें, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


महत्वपूर्ण मुद्दा

यह मामला केवल पशु प्रबंधन का नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा से भी जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां यह संकेत देती हैं कि अब इस विषय पर संतुलित और व्यावहारिक नीति की आवश्यकता है, जिसमें इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।