सुप्रीम कोर्ट ने घूसखोर पंडित फिल्म विवाद पर दी महत्वपूर्ण टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
कोर्ट ने कहा- समुदाय को बदनाम करना नहीं होगा सहन
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे नेता और अधिकारी किसी समुदाय को धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर निशाना नहीं बना सकते। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुयान की बेंच ने नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म 'घूसखोर पंडित' पर रोक लगाने की याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना संविधान के खिलाफ है और किसी भी माध्यम से समुदाय को बदनाम करना अस्वीकार्य है।
संविधान का पालन आवश्यक
कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुसार, राज्य या गैर-राज्य अभिनेता किसी भी माध्यम से किसी समुदाय को अपमानित नहीं कर सकते। बेंच ने 19 फरवरी को फिल्म निर्माता नीरज पांडे के हलफनामे को रिकॉर्ड में लेकर याचिका को समाप्त कर दिया।
जस्टिस भुयान ने अपने 39 पन्नों के फैसले में कहा कि संविधान की प्रस्तावना सभी नागरिकों के बीच भाईचारा बढ़ाने और देश की एकता को बनाए रखने का वादा करती है।
फिल्म का नाम बदला गया
मनोज बाजपेयी की फिल्म 'घूसखोर पंडित' का नाम बदल दिया गया है। पिछली सुनवाई में फिल्म निर्माता नीरज पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर बताया कि विवादित टाइटल हटा दिया गया है। नया नाम अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन यह पुराने नाम से भिन्न होगा।
