सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना पर रोक लगाने की याचिका को किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका को न केवल खारिज किया, बल्कि याचिकाकर्ता को भी कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिका की ड्राफ्टिंग और भाषा पर सख्त ऐतराज जताते हुए कोर्ट में ही याचिकाकर्ता की जमकर आलोचना की। इस याचिका में जाति जनगणना पर तत्काल रोक लगाने के साथ-साथ अन्य मांगें भी शामिल थीं, जिन्हें कोर्ट ने सुनने से भी मना कर दिया।
याचिका की भाषा पर सीजेआई का गुस्सा
यह मामला तब सामने आया जब याचिकाकर्ता चिराग हरिवंदन मोदी की याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच के समक्ष प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में केंद्र सरकार से जाति जनगणना रोकने का आदेश देने की मांग की गई थी। इसके अलावा, एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए विशेष नीति बनाने का अनुरोध भी किया गया था। याचिका को व्यक्तिगत रूप से पेश करने वाले व्यक्ति की ड्राफ्टिंग देखकर सीजेआई सूर्यकांत भड़क गए और कहा कि इस याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा कहां से सीखी है?
जाति जनगणना का दूसरा चरण
जाति जनगणना का मुद्दा वर्तमान में देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस साल जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि जनगणना का कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें जाति जनगणना दूसरे चरण में होगी। सरकार की योजना के अनुसार, पहले चरण में मकानों की सूची बनाने और उनकी गणना का कार्य शामिल है। 22 जनवरी को पहले चरण में पूछे जाने वाले 33 प्रश्नों की अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें घर में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, विवाहित जोड़ों की संख्या, घर के मुखिया का लिंग, बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच और वाहनों के प्रकार जैसी जानकारियां शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट में 25 याचिकाओं का मामला
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक और दिलचस्प घटना हुई, जब कोर्ट ने एडवोकेट सचिन गुप्ता द्वारा दाखिल की गई 25 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इन याचिकाओं में बंदूकों के उपयोग पर नीति बनाने और कानून की जागरूकता से जुड़े टीवी कार्यक्रमों के लिए नीतियां तय करने जैसे अजीब अनुरोध शामिल थे। सीजेआई ने वकील को सलाह दी कि उन्हें अपने पेशे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जब सही समय आएगा, तब इन मामलों पर विचार किया जाएगा। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद वकील ने अपनी सभी याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने तुरंत स्वीकार कर लिया।
