सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी पर दी सख्त चेतावनी, संप्रभुता को प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि देश की संप्रभुता और किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच टकराव होता है, तो संप्रभुता को प्राथमिकता दी जाएगी। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जेल से मोबाइल फोन के माध्यम से ड्रग्स तस्करी करने वाले आरोपी को जमानत दी गई थी। पीठ ने कहा कि देश के खिलाफ किसी भी प्रकार के युद्ध में, चाहे वह नशीले पदार्थों की आपूर्ति के रूप में हो, राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। अदालत ने यह भी कहा कि ड्रग्स की तस्करी न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डालती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत पहले से ही अपराधों का रिकॉर्ड है। इसलिए यह मान लेना कि जमानत मिलने पर वह पुनः अपराध नहीं करेगा, उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी ने अब तक केवल एक वर्ष और सात महीने जेल में बिताए हैं, जबकि उसे अधिकतम 20 वर्ष की सजा हो सकती है। इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उसने लंबी अवधि जेल में बिताई है और उसे जमानत दी जाए। पीठ ने यह भी माना कि कई मामलों में लंबे समय तक हिरासत को जमानत का आधार माना गया है, लेकिन इसके लिए कोई एक समान मानदंड नहीं है।
ड्रग्स कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता
एक अन्य मामले में, जिसमें ड्रग्स के कारोबार में शामिल लोगों की जमानत की अपील को मद्रास उच्च न्यायालय ने खारिज किया था, उच्चतम न्यायालय ने उस अपील को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ड्रग्स के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने की आवश्यकता है, क्योंकि वे देश की युवा पीढ़ी का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस शील नागू और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। आरोपी जून 2022 से एनडीपीएस अधिनियम के तहत जेल में है।
सुनवाई के दौरान, जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि ड्रग्स का कारोबार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि वे पीढ़ी दर पीढ़ी देश के युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहे हैं।
संप्रभुता और ड्रग्स तस्करी पर अदालत की टिप्पणियाँ
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ड्रग्स और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संबंध में की गई टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि देश की संप्रभुता सर्वोच्च है। इसके साथ ही, ड्रग्स के तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, क्योंकि वे न केवल युवा पीढ़ी के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी कमजोर कर रहे हैं। ड्रग्स तस्करों के प्रति नरम रवैया अपनाना समाज और देश दोनों के लिए हानिकारक है। इसलिए, ड्रग्स के धंधे में शामिल लोगों को कठोर सजा दी जानी चाहिए।
मुख्य संपादक का संदेश
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक
