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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार, ममता बनर्जी पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को ईडी की छापेमारी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप के लिए फटकार लगाई है। अदालत ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री जांच में बाधा डालता है, तो इसके लिए कानूनी उपाय की आवश्यकता है। मामले में आगे की सुनवाई अगले हफ्ते होगी। जानें इस विवाद के सभी पहलुओं के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार, ममता बनर्जी पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार मिली है। यह मामला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप से संबंधित है, जो ईडी द्वारा आई-पैक कार्यालय पर की गई छापेमारी के दौरान सामने आया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने इसे 'अप्रिय स्थिति' बताया। अदालत ने कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री जांच एजेंसी के कार्य में बाधा डालता है, तो इसके लिए कानूनी उपाय की आवश्यकता है। यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद में बदल गया है।


मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप गंभीर विषय

अदालत ने कहा कि मुख्यमंत्री का सरकारी कार्यालय में घुसकर हस्तक्षेप करना एक गंभीर मुद्दा है। पीठ ने यह भी पूछा कि यदि अन्य मुख्यमंत्री भी ऐसा करते हैं, तो इसका समाधान क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसी परिस्थितियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) विकसित की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एजेंसियों को असहाय नहीं छोड़ा जा सकता।


बंगाल सरकार की दलीलें

अधिवक्ता श्याम दीवान ने तर्क किया कि संविधान में समाधान उपलब्ध हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र को स्वतंत्र कार्य करने के बजाय कानूनी कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। हालांकि, अदालत ने बंगाल की स्थगन की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वे रिकॉर्ड पर मौजूद सभी तथ्यों पर विचार करेंगे। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वे किसी के निर्देशों पर कार्य नहीं करेंगे।


मामले का विवरण

यह विवाद 8 जनवरी को कोलकाता में आई-पैक कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी से संबंधित है। ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी छापे के दौरान वहां पहुंची थीं और उन्होंने छापेमारी के बीच लैपटॉप, फोन और कई फाइलें लेकर बाहर निकलीं। इसके बाद वे साल्ट लेक स्थित दूसरे कार्यालय भी गईं और वहां से भी दस्तावेज अपने साथ ले गईं।


ईडी के आरोप और ममता का जवाब

ईडी ने इसे 'शक्ति का घोर दुरुपयोग' बताया है। यह कार्रवाई कोयला घोटाले के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई थी। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने इन छापों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है, आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा आगामी चुनावों से पहले एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उल्लेखनीय है कि बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है।


सुनवाई में देरी पर टिप्पणी

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्थगन का विरोध करते हुए इसे देरी की रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि ईडी का जवाब हफ्तों पहले दाखिल किया जा चुका था। न्यायमूर्ति मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी के निर्देश पर नहीं चलेगी। पीठ ने बंगाल सरकार की अतिरिक्त समय की मांग को ठुकरा दिया। इस महत्वपूर्ण मामले पर अब अगले हफ्ते फिर से विस्तार से सुनवाई होगी।