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सुप्रीम कोर्ट ने बाबर नाम पर मस्जिद निर्माण की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी धार्मिक ढांचे के निर्माण की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि मुगल शासक बाबर एक हिंदू-विरोधी आक्रमणकारी था। इस मामले में मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित मस्जिद का भी उल्लेख किया गया था, जिसके कारण राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ। जानें इस निर्णय के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव।
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सुप्रीम कोर्ट ने बाबर नाम पर मस्जिद निर्माण की याचिका खारिज की

बाबर या बाबरी मस्जिद नाम विवाद


बाबर या बाबरी मस्जिद नाम विवाद: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी धार्मिक संरचना के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने की याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद इसे खारिज कर दिया। इस याचिका में मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित मस्जिद का उल्लेख किया गया था।


सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका इस आधार पर खारिज की कि मुगल सम्राट बाबर एक हिंदू-विरोधी आक्रमणकारी था। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि बाबर के हिंदू-विरोधी आक्रमणकारी होने के बावजूद मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है। याचिका में यह दावा किया गया था कि बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बननी चाहिए।


गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने पिछले साल 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मुर्शिदाबाद में मस्जिद की नींव रखी थी, जिससे देशभर में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया था। हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी, जनता उन्नयन पार्टी, भी बना ली है। इसके अलावा, 11 फरवरी से मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू हो गया था।