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सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के दखल को बताया लोकतंत्र के लिए खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के दखल को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए ईडी की जांच पर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री जांच में हस्तक्षेप करता है, तो यह लोकतंत्र को गंभीर खतरे में डाल सकता है। ममता की ओर से पेश हुए वकील ने ईडी के अधिकारों पर सवाल उठाए। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ।
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सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के दखल को बताया लोकतंत्र के लिए खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के हस्तक्षेप को गलत ठहराया


नई दिल्ली में आई-पीएसी रेड मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप को गलत ठहराया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ममता का दखल लोकतंत्र के लिए खतरा है। जस्टिस कुमार ने कहा कि यदि किसी राज्य का मुख्यमंत्री ऐसा करता है, तो यह लोकतंत्र को गंभीर खतरे में डाल सकता है।


ईडी को जांच का अधिकार नहीं

ममता बनर्जी की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि ईडी को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ईडी का अधिकारी केवल सरकारी कर्मचारी है और वह अपने विभाग से अलग किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता।


ईडी की शक्तियों पर सवाल

ईडी ने अदालत में कहा कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, लेकिन सिंघवी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी केवल अपनी ड्यूटी निभा रहा है। ईडी को खुद को जनता का रक्षक बताकर कोर्ट में नहीं आना चाहिए।


संविधान की व्याख्या

जस्टिस कुमार ने कहा कि संविधान बनाते समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक मुख्यमंत्री किसी जांच एजेंसी के दफ्तर में पहुंच जाएगा। यह केवल एक व्यक्ति का कार्य है और इसे लोकतंत्र का विवाद बताना उचित नहीं है।


ईडी की छापेमारी

8 जनवरी को ईडी की टीम ने आई-पीएसी के प्रमुख प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर और दफ्तर पर छापा मारा था। ममता बनर्जी छापेमारी के दौरान प्रतीक के घर पहुंच गई थीं और कुछ दस्तावेज लेकर चली गई थीं। ईडी ने ममता और राज्य पुलिस अधिकारियों पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।