सुप्रीम कोर्ट ने 'यादव जी की लव स्टोरी' पर याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली: बॉलीवुड की फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि किसी फिल्म के शीर्षक को केवल इस आधार पर असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता कि वह किसी समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
अदालत ने कहा कि उन्होंने उपलब्ध सामग्री का अवलोकन किया है। मुख्य शिकायत यह थी कि फिल्म का नाम यादव समुदाय को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है, इसलिए शीर्षक में बदलाव की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि वे यह समझने में असमर्थ हैं कि शीर्षक किस प्रकार से समुदाय को नकारात्मक रूप में दर्शाता है। शीर्षक में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को खराब रोशनी में दिखाता हो।
पीठ ने अपने पूर्व आदेश 'घूसखोर पंडित' मामले से इस मामले को अलग बताया। अदालत ने कहा कि 'घूसखोर' शब्द का अर्थ भ्रष्ट होता है, जिससे एक समुदाय के साथ नकारात्मक अर्थ जुड़ता है, जबकि इस मामले में ऐसा कोई नकारात्मक अर्थ नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत जो युक्तिसंगत प्रतिबंध हैं, वे इस मामले में लागू नहीं होते। फिल्म का नाम यादव समुदाय को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत नहीं करता है, इसलिए याचिका खारिज की जाती है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि फिल्म अभी रिलीज़ नहीं हुई है और यदि रिलीज़ के बाद कुछ आहत करता है तो उन्हें पुनः अदालत आने की अनुमति दी जाए। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि 'थोड़ी मोटी चमड़ी रखिए, यह एक फिक्शन है। एक सप्ताह में सब खत्म हो जाएगा। आजकल कोई थिएटर नहीं जा रहा, सब मोबाइल पर देख रहे हैं।'
वकील ने यह भी कहा कि फिल्म में लड़की के चरित्र को जिस तरह से दिखाया गया है, वह आपत्तिजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी समुदाय के बीच विवाह का विरोध नहीं कर रहे हैं। अदालत ने दोहराया कि यह एक फिक्शन है। जब वकील ने कहा कि निर्माता इसे वास्तविक कहानी पर आधारित बता रहे हैं, तब अदालत ने 'बेंडिट क्वीन' का उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि उस मामले में भी ऐसा ही तर्क दिया गया था, लेकिन अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आशंका या संवेदनशीलता के आधार पर फिल्म के शीर्षक या प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
