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सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम के दिशानिर्देशों पर हस्तक्षेप से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार के वंदे मातरम बजाने के दिशानिर्देशों पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि जब तक इन नियमों के उल्लंघन पर कोई दंड का प्रावधान नहीं है, तब तक न्यायपालिका इसमें दखल नहीं देगी। याचिकाकर्ता ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि देशभक्ति को जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता। जानें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है और क्या हैं दिशानिर्देशों के पीछे के तर्क।
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सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम के दिशानिर्देशों पर हस्तक्षेप से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय


केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए वंदे मातरम बजाने के दिशानिर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले को समय से पहले समाप्त कर दिया।


न्यायालय का स्पष्ट रुख

अदालत ने कहा कि जब तक इन नियमों के उल्लंघन पर कोई दंड का प्रावधान नहीं है, तब तक न्यायपालिका इसमें दखल नहीं देगी। जस्टिस बागची ने कहा कि यह नियम उन लोगों की स्वतंत्रता की रक्षा करता है जो राष्ट्र गीत गाते हैं और जो नहीं गाते।


सरकार की अधिसूचना पर प्रतिक्रिया

पीठ ने कहा कि सरकार की अधिसूचना केवल एक सलाह और प्रोटोकॉल है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा रहा है, इसलिए जब तक इसे अनिवार्य नहीं किया जाता, तब तक सुनवाई नहीं होगी।


याचिकाकर्ता की दलील

यह याचिका मोहम्मद सईद नूरी द्वारा दायर की गई थी, जो एक शैक्षणिक संस्थान चलाते हैं। उनके वकील संजय हेगड़े ने कहा कि देशभक्ति को जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि भले ही ये दिशानिर्देश सलाहकारी हों, लेकिन इसके माध्यम से लोगों पर सामाजिक दबाव डाला जा सकता है।


सुप्रीम कोर्ट के सवाल

इस पर अदालत ने याचिकाकर्ता से कई सवाल पूछे। CJI सूर्यकांत ने नूरी से पूछा कि क्या उन्हें कोई नोटिस मिला है जिसमें उन्हें राष्ट्र गीत बजाने के लिए मजबूर किया गया हो। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को यह नहीं पता कि याचिकाकर्ता का स्कूल मान्यता प्राप्त है या नहीं।


नियमों का विश्लेषण

जस्टिस बागची ने यह भी पूछा कि क्या 28 जनवरी की अधिसूचना के तहत राष्ट्र गीत न गाने पर किसी को दंडित करने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि दिशानिर्देशों के खंड 5 में 'may' शब्द का उपयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि यह पूरी तरह से वैकल्पिक है।