सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम गाने के लिए गृह मंत्रालय के सर्कुलर को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली में वंदे मातरम गाने को लेकर गृह मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों और कार्यक्रमों के लिए जारी निर्देश अनिवार्य नहीं हैं।
यह याचिका समय से पहले दायर की गई थी और इसे सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सुना। बेंच ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में वंदे मातरम न गाने पर किसी भी प्रकार की सजा का प्रावधान नहीं है।
सीजेआई का सवाल
बेंच ने कहा कि ये दिशानिर्देश केवल एक प्रोटोकॉल हैं और इनका पालन करना अनिवार्य नहीं है। जब याचिकाकर्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी, तब हम इस पर विचार करेंगे।
अदालत मुहम्मद सईद नूरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा, "हमें वह नोटिस दिखाइए जिसमें आपको राष्ट्रगान बजाने के लिए मजबूर किया गया है।"
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जो व्यक्ति वंदे मातरम गाने या राष्ट्रगीत के समय खड़े होने से इनकार करता है, उस पर हमेशा बहुत बड़ा बोझ होता है।
भेदभाव का आरोप
जस्टिस बागची ने कहा कि यह केवल एक दृष्टिकोण है और लोग इससे असहमत हो सकते हैं। यदि आपके खिलाफ कोई कार्रवाई होती है, तो आप फिर से कोर्ट में आ सकते हैं। वर्तमान में यह याचिका भेदभाव के एक अस्पष्ट अंदेशे के अलावा और कुछ नहीं है।
