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सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुनवाई पूरी की

सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुनवाई पूरी कर ली है। इस मामले में केंद्र सरकार ने महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया है। अदालत अब धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक नैतिकता पर निर्णय लेगी। सितंबर 2018 में पहले के फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को असंवैधानिक बताया गया था। जानें इस महत्वपूर्ण सुनवाई के सभी पहलुओं के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुनवाई पूरी की

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का समापन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सुनवाई पूरी कर ली है। इसके साथ ही अन्य धार्मिक स्थलों पर भेदभाव और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई। सुनवाई की शुरुआत 7 अप्रैल को हुई थी और 14 मई को इसे समाप्त कर दिया गया।


चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में इस बेंच ने 16 दिनों तक केंद्र सरकार, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं। अदालत अब धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे, संवैधानिक नैतिकता और धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं पर निर्णय लेगी। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मासिक धर्म की उम्र वाली महिलाओं का सबरीमाला मंदिर में प्रवेश है।


यह ध्यान देने योग्य है कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर लगी पाबंदी को असंवैधानिक करार दिया था। इस फैसले को चुनौती दी गई है। नौ जजों की संविधान बेंच में 16 दिनों की सुनवाई के दौरान सात संवैधानिक सवालों पर बहस हुई। इस मामले में केंद्र सरकार महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ है।


सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद और दरगाहों में प्रवेश और पारसी महिलाओं के अगियारी में प्रवेश से जुड़े मुद्दे भी इस बड़ी बेंच के समक्ष रखे गए थे। सबरीमाला मंदिर मामले पर सुनवाई 7 अप्रैल से शुरू हुई थी, जिसमें सबसे पहले केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा और महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ दलीलें दीं। सरकार ने कहा कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश भी प्रतिबंधित है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।