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सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई: हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले पर चल रही सुनवाई में वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से हस्तक्षेप न करने की अपील की। उन्होंने बताया कि कुत्तों से संबंधित कानून पहले से मौजूद हैं और संसद भी इस मामले में दखल नहीं दे रही है। सुनवाई के दौरान अरावली केस का उदाहरण भी दिया गया, जिसमें विशेषज्ञों की कमी के कारण निर्णय पर पुनर्विचार करना पड़ा। इस मामले में महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों और अस्पतालों में कुत्तों की उपस्थिति पर भी चर्चा हुई।
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सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई: हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं

आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई


सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले पर तीसरे दिन की सुनवाई
कुत्तों से संबंधित कानून पहले से ही मौजूद हैं, इसलिए अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यह तर्क सुप्रीम कोर्ट में पेश याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रस्तुत किया। इस मामले की सुनवाई आज तीसरे दिन हो रही थी। एसीजीएस (ऑल क्रिएचर्स ग्रेट एंड स्मॉल) नामक संस्था की ओर से सिंघवी ने अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि जब संसद इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर रही है, तो अदालत को भी नहीं करना चाहिए।


अरावली केस का उदाहरण

सिंघवी ने अरावली केस का उदाहरण देते हुए कहा कि उस मामले में बनी समिति में अधिकांश सदस्य विशेषज्ञ नहीं थे, जिसके कारण निर्णय पर पुनर्विचार करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों से संबंधित निर्णय सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली हिल्स माना जाएगा। 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने अपने निर्णय पर रोक लगाते हुए कहा कि पहले विशेषज्ञों की राय आवश्यक है।


महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ

वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी ने कहा कि लोग कुत्ते रखने वाली महिलाओं के बारे में अपमानजनक बातें करते हैं, जैसे कि महिलाएं संतोष के लिए कुत्तों के साथ सोती हैं। एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कुत्तों के माइक्रो-चिप लगाने की सलाह दी, जो 100-200 रुपये की लागत में हो सकती है। यदि कोई आक्रामक कुत्ता लोगों के पीछे भागता है, तो उसे ट्रैक किया जा सकता है। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा कि उन देशों की जनसंख्या कितनी है? हमें व्यावहारिक बातें करनी चाहिए।


अस्पतालों में कुत्तों की उपस्थिति

एक वकील ने कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। एआईआईएमएस में गोल्डी नाम की एक फीमेल डॉग कई वर्षों से है। इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों में कीड़े होते हैं। यदि ऐसे कुत्ते अस्पताल में होंगे, तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है। अस्पतालों में कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें।