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सेना प्रमुख का संदेश: भारतीय सशस्त्र बल हर चुनौती के लिए तैयार

महाराष्ट्र के खडकवासला में आयोजित 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड में सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सशस्त्र बलों की तत्परता और सुरक्षा चुनौतियों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हर स्थिति के लिए तैयार है और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रयास का परिणाम बताया। जनरल द्विवेदी ने नए कैडेट्स को संबोधित करते हुए भविष्य की चुनौतियों और एनडीए में मिले प्रशिक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
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सेना प्रमुख का संदेश: भारतीय सशस्त्र बल हर चुनौती के लिए तैयार

महाराष्ट्र में पासिंग आउट परेड का आयोजन


महाराष्ट्र: खडकवासला में स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान, थल सेनाध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी ने देश की सुरक्षा और सेना की तत्परता पर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी, तो भारतीय सशस्त्र बल ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।


सेना प्रमुख का बयान

जनरल द्विवेदी का यह बयान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के प्रति सख्त रुख को दर्शाता है। परेड की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि मई 2025 में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक बन चुका है। इसे एक बेंचमार्क के रूप में देखा जा रहा है, जिसने यह साबित किया है कि भारत किसी भी चुनौती का प्रभावी और निर्णायक तरीके से सामना कर सकता है।


सेना प्रमुख का संबोधन

सेना प्रमुख ने नए कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सुरक्षा चुनौतियां पहले से कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। उन्होंने बताया कि खतरे हमेशा पारंपरिक युद्ध के रूप में नहीं आते। ग्रे जोन संघर्ष, हाइब्रिड युद्ध और आधुनिक तकनीक आधारित चुनौतियों के बीच सैनिकों को तेज सोच और बेहतर निर्णय क्षमता के साथ कार्य करना होगा।


उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रयास का परिणाम थी। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया और आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। इस अभियान ने दुनिया को भारत की सामरिक क्षमता का संदेश दिया।


भविष्य की चुनौतियां

जनरल द्विवेदी ने भविष्य में सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संचालन को सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कैडेट्स को बताया कि एनडीए में जो प्रशिक्षण मिलता है, वही आगे चलकर सैन्य नेतृत्व की नींव बनता है।


अपने संबोधन के दौरान, सेना प्रमुख भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं इसी संस्थान से पास आउट हुए थे और नए कैडेट्स को अपने करियर की शुरुआत करते देख गर्व महसूस कर रहे हैं। एनडीए में सीखे गए मूल्य और अनुशासन जीवनभर सैनिकों के साथ रहते हैं।


इस वर्ष की पासिंग आउट परेड में 12 मित्र देशों के 24 कैडेट्स भी शामिल हुए। सेना प्रमुख ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि विभिन्न देशों से आने के बावजूद एनडीए सभी को समान मूल्यों और सैन्य परंपराओं से जोड़ता है।