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सोनम वांगचुक का 6 महीने बाद लेह में स्वागत, कहा- हिरासत का समय आत्ममंथन का अवसर था

सोनम वांगचुक, लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, 170 दिनों के बाद लेह लौट आए हैं। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके संघर्ष के लिए एक नया सूरज उगेगा। वांगचुक ने जेल में बिताए समय को आत्ममंथन का अवसर बताया और अपनी पत्नी गीतांजली की कानूनी लड़ाई में आई कठिनाइयों का भी जिक्र किया। जानें उनके अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बारे में।
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सोनम वांगचुक का लेह में स्वागत

कहा- उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे
Sonam Wangchuk, (लेह): लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार को लगभग 170 दिनों के बाद लेह लौटे। उनके स्वागत के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वांगचुक के सैकड़ों समर्थक शामिल हुए। वांगचुक ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य के लिए हम प्रयास कर रहे हैं, उसके लिए एक नया सूरज उगेगा।

उन्होंने कहा, "हम उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं।" वांगचुक ने यह भी बताया कि 170 दिनों के बाद इन पहाड़ों में वापस आकर और लोगों से मिलकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने उन सभी का धन्यवाद किया, जिन्होंने इस संघर्ष में उनका साथ दिया।


कानूनी लड़ाई में गीतांजली को कठिनाइयों का सामना

वांगचुक ने जेल में बिताए समय को कठिन अनुभव बताते हुए कहा कि यह समय आत्ममंथन का अवसर था। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजली को कानूनी लड़ाई में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दरअसल, केंद्र सरकार ने 14 मार्च को वांगचुक पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) को हटा दिया था।

पिछले साल लद्दाख में उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई थी। इसके बाद 26 सितंबर को वांगचुक को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया और उन्हें तुरंत जोधपुर भेज दिया गया। वे 170 दिनों तक जोधपुर जेल में रहे।