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सोनम वांगचुक की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस: संवाद की आवश्यकता पर जोर

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से रिहाई के बाद पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। उन्होंने लद्दाख के भविष्य और सरकार के साथ संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। वांगचुक ने अपनी पत्नी के संघर्ष का भी उल्लेख किया और बताया कि कैसे लद्दाख के लोग सरकार से बातचीत की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। जानें उनके अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बारे में।
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सोनम वांगचुक की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस: संवाद की आवश्यकता पर जोर

नई दिल्ली में सोनम वांगचुक की उपस्थिति


नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से रिहा होने के बाद अपनी पहली सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज की। मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, उन्होंने हाल की घटनाओं और लद्दाख के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। वांगचुक ने कहा कि वे मानसिक रूप से लंबी कैद के लिए तैयार थे, लेकिन सरकार द्वारा बातचीत का प्रस्ताव एक सकारात्मक बदलाव है। इस अवसर पर, उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि आंगमो के साहसिक संघर्ष का भी उल्लेख किया।


जेल में अनुभव और पत्नी का संघर्ष

वांगचुक ने बताया कि उन्हें बिना किसी सूचना के अचानक घर से उठाकर जेल भेजा गया। एक हफ्ते से अधिक समय तक उन्हें अपने परिवार या वकीलों से बात करने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि की बहादुरी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कैंपस को सुरक्षाबलों ने घेर लिया था। गीतांजलि ने दिल्ली भागकर और कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर उनके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी, जो किसी फिल्मी कहानी की तरह रोमांचक और तनावपूर्ण थी।


संवाद की प्रक्रिया का महत्व

संवाद की जीत 


प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक ने संवाद को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अपनी रिहाई और नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत को एक 'विन-विन' स्थिति बताया। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने लद्दाख की जनता के साथ विश्वास बहाली के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वांगचुक ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि एक ऐसा समाधान खोजना है जिससे सरकार और जनता दोनों संतुष्ट हों।


आंदोलन का उद्देश्य

आंदोलन और विन-विन स्थिति 


पर्यावरण कार्यकर्ता ने स्पष्ट किया कि पिछले पांच वर्षों से लद्दाख में चल रहे आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सरकार के साथ सार्थक बातचीत शुरू करना था। उन्होंने एक अनोखे उदाहरण का उल्लेख किया जहां जनता खुद सरकार से संवाद की गुहार लगा रही थी। आमतौर पर सरकारें लोगों से बात करने की अपील करती हैं, लेकिन लद्दाख के लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर बातचीत की मेज पर आने का अनुरोध कर रहे थे। इसके लिए उन्हें पैदल मार्च भी करना पड़ा।


भविष्य की योजनाएं

भविष्य की रणनीति 


अनशन के बारे में वांगचुक ने कहा कि वे कभी भी स्वेच्छा से भूख हड़ताल पर नहीं बैठना चाहते, बल्कि परिस्थितियों के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ता है। अब जब सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है, तो उन्हें उम्मीद है कि यह भविष्य के लिए एक अच्छा उदाहरण बनेगा। वे जल्द ही लद्दाख लौटकर लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के नेताओं से भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे ताकि राज्य का दर्जा और अन्य संवैधानिक मांगों को सुलझाया जा सके।


जेल प्रशासन की सराहना

जेल प्रशासन का मानवीय चेहरा 


वांगचुक ने जेल प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जेल का स्टाफ और वहां के लोग बेहद ईमानदार और दयालु थे। कर्मचारियों ने कड़े अनुशासन और कानून का पालन करते हुए भी अपनी इंसानियत को बनाए रखा। हालांकि उन्होंने पहले कई भयावह कहानियां साझा करने की योजना बनाई थी, लेकिन अब संवाद की प्रक्रिया शुरू होने के कारण वे उन कड़वी यादों को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखना चाहते हैं। सरकार की पहल ने उन्हें डरावनी कहानियां साझा करने से बचा लिया।