Newzfatafatlogo

सोनौली नगर पंचायत में बिजली की बर्बादी पर उठे सवाल

सोनौली नगर पंचायत में दिन के उजाले में जलती स्ट्रीट लाइटों की समस्या ने बिजली की बर्बादी को उजागर किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह लापरवाही न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि नगर पंचायत के राजस्व पर भी असर डाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई शिकायत मिली, तो सुधार किया जाएगा। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 | 
सोनौली नगर पंचायत में बिजली की बर्बादी पर उठे सवाल

बिजली की बर्बादी का मामला


भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित सोनौली नगर पंचायत क्षेत्र में इन दिनों बिजली की बर्बादी की गंभीर समस्या सामने आई है। यहां की मुख्य सड़कों पर दिन के समय भी स्ट्रीट लाइटें जलती रहती हैं। जबकि सरकार बिजली बचाने के लिए प्रयासरत है, नगर पंचायत की यह लापरवाही कई सवाल खड़े कर रही है।


स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई रास्तों पर सुबह से लेकर दोपहर तक स्ट्रीट लाइटें जलती रहती हैं। शाम को लाइटें जलाने के बाद सुबह उन्हें बंद न करना यहां एक सामान्य बात बन गई है। इससे न केवल बिजली की बर्बादी हो रही है, बल्कि नगर पंचायत के राजस्व पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।


नगर पंचायत ने बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए क्षेत्र में बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें लगाई थीं, लेकिन अब उनकी देखरेख के अभाव में यह व्यवस्था समस्या का कारण बन गई है। नागरिकों का सुझाव है कि यदि समय पर लाइटें बंद करने की जिम्मेदारी तय की जाए या ऑटोमैटिक टाइमर और सोलर सिस्टम लगाए जाएं, तो समस्या का समाधान संभव है।


नगर पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि दिन में कहीं भी लाइटें जलती पाई गईं, तो तुरंत सुधार किया जाएगा और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


बॉर्डर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की लापरवाही न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और सुधार कितनी जल्दी किया जाता है।