सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में पीएम मोदी का ऐतिहासिक संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेते हुए इतिहास, आस्था और राष्ट्रीय चेतना पर जोरदार संबोधन दिया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कुछ सरकारों और विचारधाराओं ने भारत के नायकों और सोमनाथ मंदिर के वास्तविक इतिहास को दबाने की कोशिश की. पीएम मोदी ने इसे गुलामी की मानसिकता करार देते हुए कहा कि यह पर्व केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान का उत्सव है.
जनसमूह का उत्साह
सोमनाथ मंदिर परिसर में विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देशभर से लाखों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर से जुड़े हैं. उन्होंने जय सोमनाथ के उद्घोष के साथ वातावरण को अद्भुत बताया. समुद्र की लहरें, मंत्रोच्चार और भक्तों की उपस्थिति ने आयोजन को दिव्य बना दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उत्सव आस्था, ऊर्जा और भारत की चेतना का प्रतीक है.
इतिहास को दबाने के प्रयासों पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के इतिहास को जानबूझकर नजरअंदाज किया. उन्होंने कहा कि लोगों को यह सिखाया गया कि मंदिर केवल लूट के लिए तोड़ा गया, जबकि सच्चाई इससे कहीं गहरी है. पीएम मोदी के अनुसार, मजहबी उन्माद और अत्याचार के वास्तविक इतिहास को छिपाने के लिए किताबें लिखी गईं, जिससे पीढ़ियां भ्रमित होती रहीं.
बलिदान, संघर्ष और अमर आस्था की कथा
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ की रक्षा के लिए असंख्य नायकों ने बलिदान दिए. हजार साल पहले आक्रांताओं को लगा कि उन्होंने सोमनाथ को जीत लिया, लेकिन समय ने साबित किया कि सनातन आस्था को पराजित नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि आज भी मंदिर पर फहराती ध्वजा भारत की शक्ति और सामर्थ्य का उद्घोष कर रही है.
भव्य आयोजन और आध्यात्मिक अनुभूति
पीएम मोदी ने 72 घंटे तक चले ओंकार नाद, मंत्रोच्चार और हजार ड्रोन शो का उल्लेख किया, जिसमें सोमनाथ के एक हजार वर्षों का इतिहास प्रदर्शित किया गया. 108 अश्वों के साथ निकली शौर्य यात्रा और भजनों की प्रस्तुति को उन्होंने अविस्मरणीय बताया. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस अनुभूति को शब्दों में बांधना कठिन है, इसे केवल महसूस किया जा सकता है.
पुनर्निर्माण और राष्ट्रीय स्वाभिमान का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण और विजय का इतिहास है. उन्होंने याद दिलाया कि 1951 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था, जिसका तब विरोध हुआ. पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हजार साल की यात्रा और भारत के अस्तित्व, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना का पर्व है.
