स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बीच भारत सरकार का बड़ा बयान
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ता तनाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है। भारत सहित कई देशों में एलपीजी की कमी महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है।
भारत सरकार का स्पष्ट संदेश
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, से गुजरने के लिए किसी भी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी।
जलमार्ग मंत्रालय की जानकारी
राजेश कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं है। अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के अनुसार, यहां आवागमन की स्वतंत्रता है। उन्होंने बताया कि मार्ग संकरा होने के कारण केवल प्रवेश और निकासी के रास्ते चिन्हित किए गए हैं, जिनका पालन सभी जहाजों को करना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कोई शुल्क या सुरक्षा राशि नहीं ली जा रही है। राजेश ने यह अफवाहें भी खारिज कीं कि फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को ईरान के साथ किसी समझौते के बाद ही गुजरने की अनुमति मिलेगी।
भारतीय जहाजों की स्थिति
भारतीय अधिकारियों ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में कई भारतीय जहाज अभी भी फंसे हुए हैं। इनमें एलपीजी के पांच टैंकर शामिल हैं, जिनमें लगभग 2.3 लाख टन रसोई गैस लदी हुई है। इसके अलावा, एक खाली जहाज में एलपीजी भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मिडिल ईस्ट में कुल 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिन पर सैकड़ों भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार का ध्यान इन जहाजों और नाविकों की सुरक्षित वापसी पर है।
नाविकों की सुरक्षा प्राथमिकता
सिंह ने कहा कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सोमवार को दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर, पाइन गैस और जग वसंत, ने सफलतापूर्वक होर्मुज को पार कर लिया। दोनों जहाज एक-दूसरे के निकट चल रहे हैं और एक जहाज 26 मार्च और दूसरा 27 मार्च को भारत पहुंच जाएगा।
