स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस समय वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले ऊर्जा व्यापार को बाधित कर रखा है। भारत को इस रूट से अपने ऊर्जा व्यापार के संचालन की अनुमति मिली है, और भारतीय नौसेना की सहायता से यह व्यापार धीरे-धीरे भारत पहुंच रहा है।
भारतीय नौसेना की गतिविधियाँ
भारतीय नौसेना केवल टैंकरों की सुरक्षा नहीं कर रही है, बल्कि उन्हें होर्मुज पार करने के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, नौसेना उन जहाजों के संपर्क में रहती है, जिन्हें फारस की खाड़ी से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करना होता है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से, नौसेना इन जहाजों को यह बताती है कि उन्हें किस मार्ग से गुजरना चाहिए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने के बाद, भारतीय नौसेना के युद्धपोत उन्हें सुरक्षित रूप से आधे रास्ते तक ले जाते हैं।
तैनाती और सुरक्षा उपाय
भारतीय नौसेना ने अपनी तैनाती को ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ा दिया है। अधिकारियों के अनुसार, एस्कॉर्ट ऑपरेशन को निरंतर बनाए रखने के लिए क्षेत्र में पर्याप्त युद्धपोत और लॉजिस्टिक समर्थन तैनात किया गया है।
हाइड्रोग्राफिक चार्ट का महत्व
दुनिया भर की शिपिंग कंपनियाँ हाइड्रोग्राफिक चार्ट का उपयोग करती हैं, जो समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए आवश्यक हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बताया है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अंडरवॉटर माइंस बिछाई हैं, जो जहाजों के लिए खतरा बन सकती हैं। इसलिए, भारतीय नौसेना भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग बताने में सहायता कर रही है।
चार्ट बनाने की प्रक्रिया
हाइड्रोग्राफिक चार्ट समुद्र की गहराई और अन्य खतरों को दर्शाते हैं। ये चार्ट सर्वे वेसल्स द्वारा तैयार किए जाते हैं, जो समुद्र की तलहटी का स्कैन करके सुरक्षित नेविगेशन रूट्स को चिह्नित करते हैं। अरब सागर और हिंद महासागर में चलने वाले अधिकांश जहाज भारत द्वारा बनाए गए हाइड्रोग्राफिक चार्ट का उपयोग करते हैं।
मित्र देशों के साथ सहयोग
भारतीय नौसेना न केवल भारत के लिए, बल्कि मित्र देशों के अनुरोध पर उनके विशेष आर्थिक क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने में भी सहायता करती है। भारत के कई देशों के साथ समझौते हैं, जिनके तहत भारत उनके समुद्री क्षेत्रों का हाइड्रोग्राफिक सर्वे कर नेविगेशन चार्ट तैयार करता है। एक बार चार्ट तैयार हो जाने पर, यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य हो जाता है और कोई भी देश या कंपनी इसे खरीदकर अपने समुद्री कार्यों के लिए उपयोग कर सकती है।
