स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना: माघ मेले में विवाद और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
माघ मेले में धरना प्रदर्शन
माघ मेला 2026: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना माघ मेले में जारी है। उन्होंने मेला प्राधिकरण द्वारा भेजे गए नोटिस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से पेश कर नोटिस दिया गया है।
नोटिस का कानूनी पहलू
नोटिस अवमानना की श्रेणी में
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनके वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि प्रशासन द्वारा भेजा गया नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के अंतर्गत आता है। उन्होंने बताया कि रात 12 बजे एक अधिकारी उनके पास आया और नोटिस स्वीकार करने का दबाव डाला।
सरकार की भूमिका
सरकार ने उन्हें शंकराचार्य माना
स्वामी ने सवाल उठाया कि मेला प्राधिकरण को इतनी जल्दी क्या समस्या आ गई कि आधी रात को नोटिस चस्पा किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने महाकुंभ में उन्हें शंकराचार्य के रूप में मान्यता दी थी।
विवाद का कारण
अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद के बीच विवाद
माघ मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर 24 घंटे में यह साबित करने को कहा है कि वे असली शंकराचार्य हैं। कानूनगो ने उनके शिष्यों से नोटिस लेने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद नोटिस गेट पर चस्पा कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने बताया कि नोटिस में 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जबकि असली आदेश 21 सितंबर 2022 का है, जिसमें उन्हें शंकराचार्य बताया गया था।
स्वामी का पक्ष
शंकराचार्य के रूप में पहचान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शंकराचार्य के रूप में पहचानने से नहीं रोका है। उन्होंने कहा कि नोटिस देने वालों को जवाब दिया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
अखिलेश यादव का समर्थन
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से फोन पर बात की है। उन्होंने कहा कि किसी पार्टी को मदद के लिए नहीं बुलाया गया है।
स्वामी निश्चलानंद का बयान
स्वामी निश्चलानंद का मौन समर्थन
स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि वे इस विवाद में कुछ नहीं बोलना चाहते। उन्होंने मेला प्रशासन के निर्णय को सही बताया और कहा कि मीडिया इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहा है।
अशोक गहलोत की निंदा
राजनीतिक बयान
प्रयागराज जैसी पावन धरा पर, माघ मेले के दौरान पूज्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ पुलिसिया दुर्व्यवहार और उनका अन्न-जल त्यागकर धरने पर बैठना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार के राज में अगर सर्वोच्च संतों का…
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 20, 2026
अशोक गहलोत ने इस घटना की निंदा की है और कहा कि संतों का अपमान करना घोर पाप है।
