हंटावायरस का खतरा: जानें इसके लक्षण और कोरोनावायरस से तुलना
नई दिल्ली में हंटावायरस का मामला
नई दिल्ली: हाल ही में हंटावायरस का एक नया मामला सामने आया है, जो लोगों के बीच तेजी से फैल रहा है। यह वायरस वर्तमान में एमवी होंडियस क्रूज पर देखा गया है, जो अटलांटिक महासागर को पार करते हुए अर्जेंटीना से केप वर्डे की ओर बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, केप वर्डे के तट पर फंसे इस क्रूज पर हंटावायरस के कुछ मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें तीन लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा, कुछ संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमित व्यक्तियों में से तीन लोग जहाज पर नहीं हैं, जबकि चार अभी भी जहाज पर मौजूद हैं।
हंटावायरस और कोरोनावायरस का परिचय
हंटावायरस की उपस्थिति ने कोरोनावायरस की याद दिला दी है, जिसने भारत में भी व्यापक तबाही मचाई थी। कई लोग इस महामारी से प्रभावित हुए और कई ने अपनी जान गंवाई। यहां हम हंटावायरस और कोरोनावायरस के बीच के अंतर को स्पष्ट कर रहे हैं।
हंटावायरस क्या है?
हंटावायरस एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के संपर्क में आने से फैलता है, खासकर उनके मल, मूत्र या लार के माध्यम से। यह वायरस तब भी फैल सकता है जब कोई व्यक्ति इन दूषित पदार्थों से बनी धूल को सांस के जरिए अंदर लेता है। हंटावायरस से हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (एचपीएस) और रीनल सिंड्रोम जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
कोरोनावायरस क्या है?
कोरोनावायरस, जो 2019 में तेजी से फैला, एक संक्रमित श्वसन बीमारी है जो SARS-CoV-2 वायरस के कारण होती है। यह आमतौर पर हवा में मौजूद कणों और बूंदों के माध्यम से फैलता है। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो यह वायरस बाहर निकलता है और यदि कोई इसे इनहेल करता है, तो वह भी संक्रमित हो सकता है।
हंटावायरस और कोरोनावायरस में अंतर
कोरोनावायरस आमतौर पर श्वसन बूंदों और एरोसोल के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, और संक्रमित सतहों के संपर्क से भी यह फैल सकता है। इसके विपरीत, हंटावायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह तब फैलता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित चूहों के मूत्र, मल या लार के संपर्क में आता है।
कौन-सा वायरस अधिक खतरनाक है?
यदि हम केस फैटालिटी रेट (CFR) की बात करें, तो हंटावायरस प्रति केस अधिक जानलेवा माना जाता है। हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) की मृत्यु दर लगभग 38% से 40% है, जबकि कोरोनावायरस का CFR लगभग 1% से 2% है। हालांकि कोरोनावायरस ने लाखों लोगों की जान ली है, हंटावायरस बहुत ही दुर्लभ है।
