हज यात्रियों के हवाई किराए में वृद्धि पर विवाद, कांग्रेस ने उठाए सवाल
हज यात्रियों के लिए किराए में वृद्धि
केंद्र सरकार ने इस वर्ष हज यात्रियों के लिए हवाई किराए में 10,000 रुपये की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इस बढ़ोतरी को लेकर हज कमेटी में विवाद उत्पन्न हो गया है। हज कमेटी का कहना है कि यह वृद्धि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में वृद्धि के चलते की गई है। हालांकि, एयरलाइंस कंपनियों ने किराए में 40,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की मांग की थी।
विपक्ष का विरोध
इस बीच, विपक्ष ने सरकार के इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस ने रविवार को हज कमेटी से इस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में हज यात्रा की लागत में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे यह आम भारतीय परिवारों के लिए असंभव हो गया है।
सरकार का स्पष्टीकरण
सरकार का कहना है कि उसने विमानन कंपनियों के साथ बातचीत करके जायरीनों पर पड़ने वाले बोझ को कम किया है और हवाई किराए में वृद्धि को केवल 100 अमेरिकी डॉलर प्रति यात्री तक सीमित रखा है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि तथ्यों को समझे बिना मंत्रालय को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
रीजीजू का बयान
रीजीजू ने एक पोस्ट में कहा, 'पश्चिम एशिया संकट के कारण विमानन कंपनियों ने प्रति यात्री 400 अमेरिकी डॉलर की वृद्धि की मांग की थी। बातचीत के माध्यम से हमने इसे घटाकर केवल 100 अमेरिकी डॉलर कर दिया है। निजी ऑपरेटरों का विकल्प चुनने वालों के लिए, वृद्धि लगभग 150 अमेरिकी डॉलर है। हमारा निरंतर प्रयास बोझ को कम करना और सभी के लिए एक सुरक्षित हज यात्रा सुनिश्चित करना है।'
हज यात्रा के लिए पैसे जमा करने की आवश्यकता
केंद्र सरकार का दावा है कि बातचीत के जरिए इस वृद्धि को सीमित रखा गया है। विपक्षी नेताओं ने हज यात्रा के हवाई किराए में हुई बढ़ोतरी की आलोचना की है और इसे अन्याय बताया है। भारतीय हज कमेटी द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने हज 2026 के लिए हवाई किराए में बदलाव की मंजूरी दी है। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि सभी हज जायरीनों को 15 मई तक हवाई किराए के अंतर के रूप में 10,000 रुपये जमा करने होंगे।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस महासचिव और सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि 28 अप्रैल, 2026 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने एक परिपत्र जारी कर प्रत्येक हज जायरीन से 15 मई तक अतिरिक्त भुगतान करने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मांग बिना किसी पूर्व सूचना और उचित कारण बताए की गई है।
जायरीनों की कठिनाइयाँ
कांग्रेस नेता ने कहा, 'जायरीनों ने कई महीनों में कई किस्तों में पूरी रकम चुका दी है, जिनमें बुजुर्ग भी शामिल हैं। कई जायरीन हज के लिए पहले ही सऊदी अरब पहुंच चुके हैं। उन्हें जो कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, वह केवल आर्थिक नहीं है। यह कुप्रबंधन का सीधा परिणाम है, और यह इस बात का संकेत है कि उन्हें नागरिकों के बजाय राजस्व स्रोत माना जा रहा है।'
कांग्रेस की मांगें
उन्होंने कहा कि कांग्रेस 28 अप्रैल के सर्कुलर को तुरंत वापस लेने, इसके तहत एकत्र की गई पूरी राशि की वापसी और 2027 सत्र शुरू होने से पहले अनिवार्य प्रतिस्पर्धी निविदा तथा हज मूल्य स्थिरता ढांचे सहित संरचनात्मक सुधारों को लागू करने की मांग करती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
इस बीच, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने हज पर गए जायरीनों द्वारा प्रबंधों की सराहना करते हुए वीडियो साझा किए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मंत्रालय हज प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखता है, ताकि हर जायरीन को यात्रा के दौरान समय पर देखभाल, सहायता और सम्मान प्राप्त हो।
