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हरियाणा में 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में नए खुलासे

हरियाणा में 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में एंटी करप्शन ब्यूरो ने मुख्य आरोपितों से पूछताछ की है। जांच में कई नए तथ्य सामने आए हैं, जिसमें संदिग्ध लेन-देन और रियल एस्टेट में निवेश शामिल हैं। आरोपितों ने स्वीकार किया है कि घोटाले की रकम का एक हिस्सा रियल एस्टेट में लगाया गया था। नगर निगम चंडीगढ़ का नाम भी इस मामले में जुड़ता नजर आ रहा है। जानें इस घोटाले की पूरी कहानी और क्या हो सकते हैं इसके परिणाम।
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हरियाणा में 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में नए खुलासे

हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच

पंचकूला, हरियाणा: हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 590 करोड़ रुपये के एक बड़े बैंक घोटाले की जांच के दौरान मुख्य संदिग्ध रिभव ऋषि और अभय को आमने-सामने बैठाकर गहन पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, एसीबी के डीएसपी शुक्रपाल ने कई चरणों में पूछताछ की, जिसमें दोनों के बयानों में कुछ बिंदुओं पर समानता और कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विरोधाभास सामने आया, जिससे जांच की गहराई बढ़ गई है।


एसीबी का कहना है कि आरोपितों ने लगभग छह से सात महीने पहले अपनी नौकरी छोड़ दी थी। इससे पहले, उन्होंने 'स्वास्तिक देश' नाम की एक कंपनी बनाई, जिसमें अभय की पत्नी स्वाति को निदेशक बनाया गया और उसके साले अभिषेक को 25 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई। सूत्रों के अनुसार, धन के लेन-देन और कथित हेरफेर के लिए 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट' का उपयोग किया गया।


प्रारंभिक जांच में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम पंचकूला से जुड़े खातों में संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं, जिनका स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। जांच में यह भी सामने आया है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा और एयू स्माल फाइनेंस बैंक के माध्यम से भारी धनराशि 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट' को ट्रांसफर की गई। जांच एजेंसियों ने कुछ मामलों में बैंकों के सहयोग की कमी की शिकायत की है।


प्रारंभिक दृष्टि में, यह मामला बैंक अधिकारियों की कथित धोखाधड़ी और गंभीर प्रक्रियागत त्रुटियों की ओर इशारा करता है। इसी आधार पर राज्य पुलिस ने विस्तृत जांच की सिफारिश करते हुए दोनों बैंकों के अज्ञात अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अन्य सार्वजनिक और निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


उपलब्ध अभिलेखों के विश्लेषण से यह संकेत मिला है कि सरकारी खातों से धनराशि मुख्य रूप से 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट' फर्म को ट्रांसफर की गई। दस्तावेजों के अनुसार, इस फर्म में स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला भागीदार हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लेन-देन के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी और धनराशि का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।


एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों बैंकों को संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से आंशिक दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, जबकि एयू स्माल फाइनेंस बैंक से पूर्ण सहयोग नहीं मिलने की बात सामने आई है।


एसीबी के सूत्रों के अनुसार, आरोपितों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि घोटाले की रकम का एक हिस्सा रियल एस्टेट में निवेश किया गया। प्रॉपर्टी के बढ़ते दामों का लाभ उठाकर मुनाफा कमाने की योजना बनाई गई थी। एजेंसी संबंधित संपत्तियों और निवेश से जुड़े दस्तावेज जुटा रही है और धन के उपयोग की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।


जांच में यह भी सामने आया है कि 'स्वास्तिक देश इंडिया' फर्म के माध्यम से सरकारी खातों से करीब 300 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। यह राशि ज्वेलर्स, बिल्डर्स, शेयर बाजार और शराब कारोबार से जुड़े व्यक्तियों तक पहुंचाई गई। कई रियल एस्टेट कारोबारियों से आरोपितों के संबंध भी सामने आए हैं, जिनसे जल्द पूछताछ हो सकती है।


इस मामले में नगर निगम चंडीगढ़ का नाम भी जुड़ता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट आईडीएफसी और एयू स्माल फाइनेंस बैंक में जमा होती थी। मिशन समाप्त होने के बाद यह राशि नगर निगम को ट्रांसफर की गई थी। आईडीएफसी बैंक से जुड़े मामले के सामने आने के बाद नगर निगम चंडीगढ़ के अधिकारियों ने खातों का मिलान शुरू किया, जिसमें कथित रूप से करीब 116 करोड़ रुपये के फंड में गड़बड़ी सामने आई है।


सूत्रों के अनुसार, नगर निगम की वित्तीय शाखा में कार्यरत एक अकाउंटेंट भी संपर्क से बाहर बताया जा रहा है। उसका फोन बंद आ रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निगम के अधिकारी सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से बच रहे हैं। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार फिलहाल विदेश दौरे पर हैं और शुक्रवार को कार्यभार संभालने की संभावना है।


फिलहाल पुलिस और सतर्कता एजेंसियां बैंक खातों, ट्रांजैक्शन पैटर्न और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच कर रही हैं। प्रशासनिक और बैंकिंग हलकों में इस मामले को लेकर हलचल है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।