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हरियाणा में किसानों के लिए डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया को तेज किया जाएगा

हरियाणा सरकार ने किसानों के लिए डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया है। साझा सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से किसानों को गांव स्तर पर ई-केवाईसी और पंजीकरण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य योजनाओं और सब्सिडी का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचाना है। जानें इस नई व्यवस्था के बारे में और कैसे यह किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
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हरियाणा में किसानों के लिए डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया को तेज किया जाएगा

किसानों के लिए नई डिजिटल पंजीकरण पहल

चंडीगढ़- हरियाणा सरकार ने राज्य में साझा सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से किसानों की रजिस्ट्री को तेजी से पूरा करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत, किसानों को डिजिटल पंजीकरण और पीएम-किसान ई-केवाईसी की सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराई जाएंगी।


राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त, डॉ. सुमिता मिश्रा ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक पहल और पीएम-किसान योजना के अंतर्गत किसान पंजीकरण का कार्य सीएससी केंद्रों के माध्यम से किया जाएगा। इससे योजनाओं, सब्सिडी और अन्य सेवाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से पात्र किसानों तक पहुंच सकेगा।


सीएससी ने अपने पत्र में बताया कि वह देश के विभिन्न राज्यों में 28 लाख से अधिक किसानों का सफल पंजीकरण कर चुका है। इसी अनुभव के आधार पर हरियाणा में भी इस प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम-किसान ई-केवाईसी के लिए प्रति किसान 15 रुपये का शुल्क सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। किसानों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा और सीएससी संचालकों को इस संबंध में सख्त निर्देश दिए गए हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस व्यवस्था से किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और अधिकांश सेवाएं गांव स्तर पर ही उपलब्ध होंगी।