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हरियाणा में भूमि पैमाइश के लिए नई तकनीक का उपयोग, पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास

हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने भूमि पैमाइश में पारदर्शिता लाने के लिए नई तकनीक का उपयोग शुरू किया है। अब पारंपरिक तरीकों की जगह जीएनएसएस रोवर्स मशीन का उपयोग किया जाएगा, जिससे सटीकता में वृद्धि होगी। इस नई प्रणाली के तहत, लोगों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा और तहसील के चक्कर नहीं लगाने होंगे। जानें इस नई व्यवस्था के तहत शुल्क संरचना और इसके लाभ क्या हैं।
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हरियाणा में भूमि पैमाइश के लिए नई तकनीक का उपयोग, पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास

हरियाणा सरकार का नया कदम

हिसार, 28 अप्रैल। हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने भ्रष्टाचार और विवादों की समस्या को हल करने के लिए भूमि पैमाइश में पारदर्शिता लाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब प्रदेश में पारंपरिक तरीके से भूमि की नाप नहीं की जाएगी। राजस्व विभाग ने 'जीएनएसएस (GNSS) रोवर्स मशीन' का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लोगों को तहसील के चक्कर नहीं लगाने होंगे। उन्हें ई-जीआरएस (e-GRS) पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। हिसार सहित सभी जिलों में ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है।


सैटेलाइट तकनीक से जुड़ेंगी तहसीलें

राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रोवर्स मशीन सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स से सिग्नल प्राप्त करती है। इसे हरियाणा में स्थापित 19 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रिफरेंस स्टेशन (CORS) नेटवर्क से जोड़ा गया है। यह तकनीक अक्षांश और देशांतर के आधार पर 1 से 2 सेंटीमीटर तक की सटीकता प्रदान करती है। हिसार जिले की 6 तहसीलों और 3 उप-तहसीलों को 17 रोवर्स मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। जिले में 120 से अधिक लोग ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं, जिनकी पैमाइश जल्द शुरू होगी।


भूमि पैमाइश के लिए निर्धारित शुल्क

सरकार ने इस नई व्यवस्था के लिए शुल्क का ढांचा भी स्पष्ट कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में 3 एकड़ कृषि भूमि की पैमाइश करवाने पर कुल 2500 रुपये का खर्च आएगा। इसमें पहले एकड़ के लिए 1000 रुपये, दो अतिरिक्त एकड़ के लिए 1000 रुपये (500 प्रति एकड़) और 500 रुपये स्थानीय कमीशन शुल्क शामिल है। गैर-कृषि भूमि जैसे फार्म हाउस के लिए पहले एकड़ की फीस 2000 रुपये तय की गई है। शहरी क्षेत्रों में 500 वर्ग गज तक के प्लॉट के लिए 2000 रुपये का फ्लैट रेट रखा गया है, जबकि इससे बड़े प्लॉट के लिए 3000 रुपये फीस और 1000 रुपये कमीशन देना होगा।


डेटा में मानवीय हस्तक्षेप नहीं

इस नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ आम जनता को मिलेगा। रोवर्स मशीन में संबंधित गांव का डिजिटल नक्शा पहले से लोड रहता है। जैसे ही पैमाइश पूरी होती है, मशीन का डेटा सीधे राजस्व विभाग के मुख्य सर्वर पर अपलोड हो जाता है। इसमें किसी भी स्तर पर मानवीय छेड़छाड़ संभव नहीं है। इससे पड़ोसियों के बीच होने वाले सीमा विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। पटवारियों को इस मशीन को चलाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है, ताकि डिजिटल हरियाणा की इस मुहिम को धरातल पर उतारा जा सके।