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हरियाणा में मछली पालन को मिली नई ऊर्जा, बिजली दरों में कमी

हरियाणा सरकार ने मछली पालन करने वाले किसानों के लिए बिजली दरों में कमी की है, जिससे उनकी लागत में कमी आएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर, गैर-कृषि फीडर से बिजली लेने वाले किसानों के लिए दरें 6.60 रुपये से घटाकर 4.75 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई हैं। इसके अलावा, सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाया गया है, जिससे किसानों को समय पर वित्तीय सहायता मिलेगी। जानें कैसे यह पहल किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
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हरियाणा में मछली पालन को मिली नई ऊर्जा, बिजली दरों में कमी

मुख्यमंत्री की पहल से मछली पालन में राहत

हिसार और सिरसा जैसे क्षेत्रों में मछली पालन करने वाले किसानों के लिए नायब सैनी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर, प्रदेश के मत्स्य पालन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए बिजली की दरों में बड़ी छूट दी गई है। पहले, जो किसान गैर-कृषि फीडर से बिजली का उपयोग कर रहे थे, उन्हें 6.60 रुपये प्रति यूनिट का भारी बिल चुकाना पड़ता था। अब इसे घटाकर 4.75 रुपये प्रति यूनिट कर दिया गया है। इसके साथ ही, कनेक्शन की लोड सीमा को 20 किलोवाट से बढ़ाकर 40 किलोवाट कर दिया गया है, जिससे बड़े तालाबों के लिए बोरवेल चलाना आसान हो जाएगा।


खारे पानी वाले जिलों में मछली पालन का नया अवसर

खारे पानी वाले सात जिलों के लिए संजीवनी बनेगा 'मत्स्य पालन'


झज्जर, भिवानी, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, नूंह और रोहतक जैसे जिलों में भूमि लवणीय होने के कारण पारंपरिक खेती में कठिनाई हो रही थी। बारिश के पानी से फसलें बर्बाद हो जाती थीं, लेकिन अब किसानों ने इसे एक अवसर में बदल दिया है। इन जिलों में झींगा मछली का उत्पादन तेजी से बढ़ा है, जो बाजार में महंगी बिकती है। सरकार अब इन मछली पालकों को किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से कृषि उद्योग का दर्जा देने की योजना बना रही है, जिससे उन्हें अपनी उपज की बेहतर ब्रांडिंग और मार्केटिंग में मदद मिलेगी।


सब्सिडी प्रक्रिया में सुधार

सब्सिडी के लिए अब नहीं काटने होंगे चक्कर, 40 दिन में आएगा पैसा


हरियाणा अधिकार सेवा अधिनियम 2014 के तहत, सरकार ने सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया है। अब सघन मत्स्य पालन विकास कार्यक्रम के तहत लोडिंग ऑटो, चारपहिया वाहन या मिनी ट्रैक्टर खरीदने वाले किसानों को सब्सिडी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आवेदन के 40 दिनों के भीतर सब्सिडी राशि सीधे उनके खाते में भेज दी जाएगी। आइस प्लांट लगाने वाले उद्यमियों को भी 50 दिनों के भीतर वित्तीय सहायता मिलेगी। इस समयबद्ध सेवा से बिचौलियों का खेल खत्म होगा और वास्तविक लाभार्थियों को समय पर लाभ मिलेगा।


जल संकट का समाधान

बारिश की कमी और बोरवेल की चुनौती का समाधान


जब मानसून कमजोर होता है, तो मछली पालकों के सामने पानी की गंभीर कमी हो जाती है। ऐसे में बोरवेल ही एकमात्र सहारा होता है। चूंकि अधिकांश मछली पालक गैर-कृषि फीडर पर निर्भर हैं, सरकार का यह निर्णय उनकी लागत को कम करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। उल्लेखनीय है कि कृषि फीडर से बिजली लेने वाले मछली पालकों को सरकार पहले से ही मात्र 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध करा रही है। अब गैर-कृषि फीडर वाले 5000 परिवारों को राहत देकर सरकार ने नीली क्रांति को नई गति दी है।