हरियाणा में मलेरिया के खिलाफ नई पहल: स्वास्थ्य विभाग की रणनीतियाँ
हरियाणा में मलेरिया के खिलाफ निर्णायक कदम
चंडीगढ़, 25 अप्रैल। विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर, हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी के खिलाफ एक निर्णायक अभियान शुरू कर रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव, डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि अब गांवों और मोहल्लों में सूक्ष्म निगरानी (Micro Monitoring) की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य संक्रमण के स्रोत का समय पर पता लगाना और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसके फैलाव को रोकना है। इसके लिए सरकार ने डेटा-ड्रिवन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया है।
विशेष टीम द्वारा हर मामले की जांच
हर मामले की होगी ‘स्पेशल टीम’ से जांच
हरियाणा में मलेरिया के किसी भी मामले की जांच अब साधारण तरीके से नहीं, बल्कि विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा की जाएगी। इस टीम में एपिडेमियोलॉजिस्ट भी शामिल होंगे, जो यह पता लगाएंगे कि संक्रमण की शुरुआत कहां से हुई। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बीमारी के क्लस्टर बनने से पहले ही उसे समाप्त किया जा सके। राज्यभर में स्वास्थ्य टीमें अब तक 950 से अधिक घर-घर सर्वे कर चुकी हैं।
प्रवासी मजदूरों पर विशेष ध्यान
प्रवासी मजदूरों और लेबर साइट्स पर विशेष नजर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 75 प्रतिशत से अधिक नए मामले बाहर से आने वाले मजदूरों से जुड़े होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, विभाग ने हर महीने के पहले सोमवार को सभी लेबर साइट्स पर विशेष जांच अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस लक्षित दृष्टिकोण से उन क्षेत्रों में संक्रमण जल्दी पकड़ में आएगा जहां प्रवासी आबादी अधिक है।
रिकॉर्ड जांच और शून्य मृत्यु दर
रिकॉर्ड जांच और शून्य मृत्यु दर
हरियाणा ने मलेरिया नियंत्रण में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया है। वर्ष 2025 में प्रदेश में 36 लाख से अधिक टेस्ट किए गए, जिससे पॉज़िटिविटी रेट घटकर मात्र 0.014 प्रतिशत रह गया है। साल 2026 की शुरुआत में भी केवल 8 मामले सामने आए हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं की मुस्तैदी को दर्शाते हैं। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में हाल के वर्षों में मलेरिया से एक भी जान नहीं गई है।
जनता से अपील
जनता और प्राइवेट डॉक्टरों से अपील
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के बुखार को नजरअंदाज न करें और तुरंत जांच करवाएं। इसके साथ ही, संक्रामक रोग अधिनियम के तहत निजी डॉक्टरों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे मलेरिया के हर मामले की सूचना तुरंत विभाग को दें। सामुदायिक भागीदारी और समय पर रिपोर्टिंग ही हरियाणा को मलेरिया मुक्त बनाने की अंतिम कुंजी है।
