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हरियाणा में मौसम का हाल: गर्मी और बदलाव की संभावना

हरियाणा में मौसम इस समय गर्म और शुष्क है, जिसमें तापमान में वृद्धि हो रही है। हिसार में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 4 मार्च के बाद मौसम में बदलाव आएगा, जिससे तापमान में गिरावट की संभावना है। किसानों को फसलों में नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है। जानें और क्या-क्या बदलाव आने वाले हैं और कैसे यह जनजीवन को प्रभावित कर सकता है।
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हरियाणा में मौसम का हाल: गर्मी और बदलाव की संभावना

हरियाणा का मौसम: गर्म और शुष्क

चंडीगढ़ से मिली हालिया जानकारी के अनुसार, हरियाणा में वर्तमान में मौसम शुष्क और गर्म बना हुआ है। तापमान में लगातार वृद्धि ने हिसार, भिवानी, रोहतक और सिरसा जैसे कई जिलों में दिन के समय गर्मी को बढ़ा दिया है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव संभव है, जो जनजीवन और कृषि गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।


हिसार में तापमान की स्थिति

हिसार जिले में अधिकतम तापमान 30.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.5 डिग्री अधिक है। वहीं, न्यूनतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औसत से 1 डिग्री ज्यादा है।


तापमान में यह वृद्धि सुबह और शाम हल्की ठंड और दिन में गर्मी का मिश्रण पैदा कर रही है, जिससे वायरल बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।


4 मार्च के बाद मौसम में बदलाव

मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, पहले सप्ताह में तापमान में लगातार वृद्धि होगी और दिन में हल्की गर्मी महसूस की जाएगी। उन्होंने बताया कि 4 मार्च के बाद सक्रिय होने वाली पश्चिमी प्रणाली से मौसम में बदलाव आएगा।


दूसरे सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में गिरावट की संभावना है, जिससे कुछ क्षेत्रों में हल्की राहत मिल सकती है।


मार्च में अधिक गर्म दिन

मौसम विभाग के अनुसार, इस बार मार्च में दिन का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जबकि रात का तापमान सामान्य के आसपास रह सकता है। पश्चिमी और दक्षिणी हरियाणा के कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है।


गर्मी के शुरुआती प्रभाव से बिजली की खपत और पानी की मांग बढ़ सकती है। शहरी क्षेत्रों में दोपहर के समय बाहर निकलने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


किसानों के लिए सलाह

बढ़ते तापमान को देखते हुए किसानों को फसलों में नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है। विशेषकर गेहूं और सरसों की फसलों में हल्की सिंचाई करने से उत्पादन पर प्रतिकूल असर कम किया जा सकता है।


कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में अचानक बदलाव से फसल की वृद्धि प्रभावित हो सकती है, इसलिए खेतों की नियमित निगरानी आवश्यक है।